पन्ना : मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान, धरम सागर तालाब, एक बार फिर अपनी खोई हुई आभा पाने की ओर अग्रसर है। सोमवार को पन्ना के जागरूक युवाओं और सामाजिक संस्थाओं ने एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने यह साबित कर दिया कि यदि समाज अपनी विरासत को सहेजने का संकल्प ले ले, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। ऐतिहासिक धरम सागर तालाब के घाटों पर सुबह से ही उत्साह का माहौल देखा गया, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों से आए युवाओं ने मिलकर स्वच्छता का एक बड़ा मोर्चा संभाला।
अभियान की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक महत्व
पन्ना नगर की हृदयस्थली कहे जाने वाले धरम सागर तालाब का महत्व केवल एक जल स्रोत के रूप में नहीं है, बल्कि यह बुंदेली स्थापत्य कला और जल प्रबंधन की प्राचीन परंपरा का जीता-जागता प्रमाण है। दशकों से यह तालाब शहर की प्यास बुझाने के साथ-साथ यहाँ की जैव विविधता का केंद्र रहा है। हालांकि, देखरेख के अभाव और बढ़ते प्रदूषण के कारण इसके घाटों पर मिट्टी, कचरा और जलीय घास का जमाव हो गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय युवाओं और एनजीओ ने इस पुनरुद्धार अभियान की रूपरेखा तैयार की।
श्रमदान की महागाथा: साढ़े चार घंटे का अनवरत प्रयास
सोमवार की सुबह जब सूरज की पहली किरणें पन्ना की धरती पर पड़ीं, तभी से धरम सागर के घाटों पर युवाओं की टोली जुटने लगी थी। इस अभियान में एडीएस डांस स्टूडियो के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, एक निजी संस्था और एक सक्रिय एनजीओ के सदस्यों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर लगभग 12:30 बजे तक अनवरत चलता रहा। इस दौरान तापमान में बढ़ोत्तरी और भीषण गर्मी भी युवाओं के हौसले को डिगा नहीं सकी।
अभियान की मुख्य कार्ययोजना और विश्लेषण
इस स्वच्छता अभियान को बेहद व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसे निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. घाटों से सिल्ट और मिट्टी का निष्कासन: बारिश के मौसम से पहले घाटों की सीढ़ियों पर जमी हुई भारी मात्रा में मिट्टी और कीचड़ को हटाया गया। यह कार्य सबसे चुनौतीपूर्ण था क्योंकि सीढ़ियों के बीच फंसी मिट्टी पत्थर की संरचनाओं को नुकसान पहुँचा रही थी।
2. प्लास्टिक और ठोस कचरे का पृथक्करण: तालाब के किनारे जमा हुए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, बोतलों, और अन्य ठोस कचरे को सावधानीपूर्वक एकत्र किया गया। युवाओं ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि कोई भी कचरा वापस पानी में न जाए।
3. जलीय घास की सफाई: तालाब के किनारे उगी अनुपयोगी घास और झाड़ियों को काटा गया, जिससे घाटों का दृश्य साफ और सुंदर नजर आने लगा।
4. जागरूकता संवाद: सफाई के साथ-साथ टीम ने वहाँ आने वाले अन्य नागरिकों से भी संवाद किया और उन्हें तालाब को गंदा न करने के लिए प्रेरित किया।
नेतृत्व और सहभागिता: सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन
इस पुनीत कार्य का नेतृत्व शहर के जाने-माने युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया। अनिरुद्ध मिस्त्री, शाकिब पठान, एडीएस डांस स्टूडियो से इकबाल मोहम्मद और आशीष कुमार जड़िया ने अग्रिम पंक्ति में रहकर टीम का मार्गदर्शन किया। उनकी ऊर्जा ने पूरी टीम में जोश भर दिया।
अभियान में शामिल प्रमुख नाम:
छात्र एवं युवा वर्ग: सोनिया रैकवार, भूमि खरे, खुशी साहू, अजय विश्वकर्मा, आर्यादीप पटेल, स्नेह विश्वकर्मा, आरव खरे, आयुष अहिरवार, नैतिक खरे, भारत कुशवाहा और ओजस्व रैकवार। इन नन्हें और युवा हाथों ने भारी भरकम कचरा उठाने में जरा भी संकोच नहीं किया।
एनजीओ टीम का योगदान: समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय एनजीओ की टीम से सौरभ गर्ग, प्रदीप त्रिपाठी, प्रधान कुशवाहा, ज्योति कुशवाह, गीतांजलि यादव, नेहा कुशवाह, प्रियांशु साहू, आकाश चौधरी, सत्यराज लोधी और मुस्कान खटीक ने भी कंधे से कंधा मिलाकर श्रमदान किया। इन सभी के सामूहिक प्रयास का ही परिणाम था कि घाटों की सीढ़ियां चमक उठीं।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संदेश
इस पहल का उद्देश्य केवल तालाब की भौतिक सफाई तक सीमित नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में अपनी ऐतिहासिक संपदा के प्रति उत्तरदायित्व की भावना जागृत होती है। जब युवा पीढ़ी अपनी मेहनत से किसी सार्वजनिक स्थान को साफ करती है, तो वह उसे गंदा करने से पहले सौ बार सोचती है। यह अभियान पन्ना के अन्य जल स्रोतों जैसे धर्म सागर, लोकपाल सागर और निरपत सागर के भविष्य के लिए भी एक शुभ संकेत है।
भविष्य की रणनीति और संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में तालाब के संरक्षण का संकल्प लिया। युवाओं ने कहा कि यह सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया की शुरुआत है। आने वाले समय में:
- तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए नियमित निगरानी की जाएगी।
- नगर पालिका और प्रशासन से डस्टबिन लगाने और नियमित कचरा उठाने की मांग की जाएगी।
- स्थानीय लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान सामग्री तालाब में न फेंकने के लिए जागरूक किया जाएगा।
निष्कर्ष
धरम सागर तालाब के घाटों की सफाई का यह अभियान पन्ना के सामाजिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। युवाओं की इस टोली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी विरासत को खोने नहीं देंगे। शासन-प्रशासन को भी इन युवाओं के जज्बे से प्रेरणा लेते हुए ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए ठोस नीतियां बनानी चाहिए। पन्ना की पहचान इन तालाबों से है, और इन तालाबों की रक्षा ही पन्ना के पर्यावरण का असली आधार है।
image source : https://www.bhaskar.com

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