पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आगामी जनगणना 2027 के संचालन को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह से सख्त रुख अपना चुका है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में गंभीर लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप में पन्ना जिले के 42 जनगणना कर्मचारियों (प्रगणकों और सुपरवाइजरों) को प्रशासन ने 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। जिला प्रशासन द्वारा उठाये गए इस कठोर कदम ने न केवल संबंधित कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है, बल्कि सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाह रहने वाले अन्य कर्मियों के लिए भी एक कड़ा संदेश दिया है।

घटना का पृष्ठभूमि और प्रशासनिक निर्देश

जनगणना 2027 एक अत्यंत महत्वपूर्ण शासकीय कार्य है, जिसके लिए पन्ना जिले के विभिन्न चार्ज अधिकारियों द्वारा प्रगणकों और सुपरवाइजरों की नियुक्ति की गई थी। इन कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे 1 मई से 30 मई तक अपने-अपने आवंटित मकान सूचीकरण ब्लॉक का कार्य त्रुटिरहित तरीके से संपन्न करेंगे और निर्धारित समय सीमा के भीतर डेटा को पोर्टल पर सिंक करना सुनिश्चित करेंगे।

हालांकि, 31 मई को जब प्रशासन ने कार्य की समीक्षा की, तो पाया गया कि इन 42 कर्मचारियों ने निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी अपना कार्य पूरा नहीं किया है। डेटा सिंक न होने के कारण जनगणना की प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न हो रहा था। जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत सौंपे गए इन शासकीय दायित्वों के प्रति यह घोर लापरवाही मानी गई है।

कलेक्टर का कड़ा रुख और नोटिस

पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार ने इस लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से इन सभी 42 कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के आदेशानुसार, इन सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नोटिस की प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर अपने-अपने चार्ज अधिकारी के माध्यम से अपना लिखित और सकारण जवाब प्रस्तुत करें।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित कर्मचारी समय सीमा के भीतर अपना जवाब देने में विफल रहते हैं, या फिर यदि उनका प्रस्तुत किया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई निश्चित है। इन कर्मचारियों पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 3 के तहत दो वार्षिक वेतनवृद्धियां (इंक्रीमेंट) रोकने की कार्यवाही की जाएगी। यह कार्रवाई न केवल पदीय दायित्वों में लापरवाही के लिए, बल्कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य को बाधित करने के लिए की जा रही है।

लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की सूची

प्रशासन द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार, पन्ना जिले के विभिन्न तहसीलों और ब्लॉकों से ये कर्मचारी दोषी पाए गए हैं:

  • पन्ना ग्रामीण चार्ज: रामनिवास शर्मा, रविशंकर मिश्रा, सुग्रीव कुमार अहिरवार और संजय कुमार चतुर्वेदी।

  • गुनौर तहसील: केदारनाथ यादव, अमित बाबू गुप्ता, विनोद कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार चौरसिया, रामअवतार चौरसिया, भगवानदास दहायत, राजेश कुमार वर्मा, रामस्वरूप वर्मा, मोहन अहिरवार, बृजवासीलाल चौरसिया और रामभुवन चौरसिया।

  • नगर परिषद गुनौर: बराकेश कुमार सेन और अमर सिंह बागरी।

  • तहसील सिमरिया: संतकुमार लोधी, शिवकुमार कोरी, रामचरण प्रजापति, संतोष शर्मा, सुरेन्द्र खम्परिया और उमाकांत खरे।

  • शाहनगर ग्रामीण: विनोद कुमार गौतम, प्रीतम सिंह गौड़, सुधा, शिवकुमार यादव, सुजान सिंह, सतीष दुबे, अखिलेश मिश्रा और सौरभ पाठक।

  • अजयगढ़ ग्रामीण: सूर्य प्रताप सिंह बघेल, रामप्यारे कोरी, राधेश्याम सिंह, राहुल अहिरवार, मातादीन अहिरवार और राधेश्याम प्रजापति।

  • तहसील रैपुरा: जीत सिंह ठाकुर, राजेश कुमार लोधी और सियाराम राजपूत।

  • देवेन्द्रनगर तहसील चार्ज: अमर सिंह यादव और इरशाद मोहम्मद सिद्दीकी।

जनगणना कार्य की महत्ता और प्रशासन का संदेश

जनगणना का डेटा देश के भविष्य की नीतियों, आर्थिक योजनाओं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं का आधार बनता है। ऐसी स्थिति में, यदि मकान सूचीकरण और डेटा सिंक करने के स्तर पर ही लापरवाही बरती जाए, तो पूरी जनगणना प्रक्रिया की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। पन्ना जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना 2027 का डेटा पूरी तरह से सटीक और समय पर प्राप्त हो। पन्ना जिले के अधिकारी अब लगातार कार्य की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जो कर्मचारी अभी तक अपने कार्य में पिछड़ रहे थे, उन्हें भी सचेत किया गया है कि वे तत्काल अपने कार्यों को पूरा करें, अन्यथा उन्हें भी ऐसी ही दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष

पन्ना प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई विभागीय अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकारी कर्मचारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समयबद्धता के साथ करें। 42 कर्मचारियों पर हुई यह कार्रवाई अब जिले के अन्य सरकारी विभागों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जनगणना के कार्य में लगे अन्य प्रगणकों और सुपरवाइजरों के लिए यह एक सबक है कि राष्ट्रीय कार्यों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि वे आगामी समीक्षा बैठकों में व्यक्तिगत रूप से कार्य की प्रगति की जांच करेंगे। जिन कर्मचारियों को नोटिस दिया गया है, उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है और उसी के आधार पर अगली कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। पन्ना प्रशासन की इस सख्ती से जनगणना कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

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