मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवता को झकझोर देने वाली सकारात्मक खबर सामने आई है। पन्ना जिले के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचल में एक असहाय और बेहद गरीब परिवार के सिर पर छत का साया नसीब हुआ है। पन्ना जिले की ग्राम पंचायत इटवा कला में स्थानीय समाजसेवियों ने एक अनूठी पहल करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण कराया है। इस नेक कार्य में पन्ना जिले के दर्जनों नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पसीना बहाते हुए इस सपने को सच कर दिखाया। जिस परिवार के पास रहने के लिए ढंग की झोपड़ी तक नहीं थी और जो लगातार कुदरत व किस्मत की मार झेल रहा था, आज उस परिवार को समाज के इन संभ्रांत और संवेदनशील नागरिकों के कारण एक सुरक्षित और नया आशियाना मिल गया है। इस मानवीय पहल की पूरे पन्ना जिले में जमकर प्रशंसा की जा रही है और हर कोई इन समाजसेवियों की दरियादिली की मिसाल दे रहा है।
पन्ना जिले की इटवा कला पंचायत का मामला
यह पूरी मानवीय घटना पन्ना जिले की जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत इटवा कला की है। इस गांव में स्व. कल्ला आदिवासी की पत्नी इमरत बाई अपने तीन छोटे बच्चों के साथ बेहद दयनीय और संघर्षपूर्ण जीवन बिता रही थीं। इमरत बाई के जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूट पड़ा था जब उनके पति का निधन हो गया था। पति के दुनिया से चले जाने के बाद इस असहाय महिला के सामने अपने बच्चों का भरण-पोषण करने की बहुत बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा खराब थी कि वे दो वक्त की रोटी के लिए भी पूरी तरह से दूसरों के यहां की जाने वाली मजदूरी पर निर्भर थे। पन्ना जिले के इस ग्रामीण इलाके में इस परिवार की सुधि लेने वाला कोई नहीं था, और वे एक बेहद जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी पुरानी झोपड़ी में किसी तरह अपना जीवन गुजारने को मजबूर थे, जहां बरसात के दिनों में पानी टपकता था और ठंड में कड़ाके की हवाएं सीधे अंदर आती थीं।
दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी और कागजों के अभाव में अटकी सरकारी मदद
इस गरीब परिवार की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होती थीं, बल्कि इनकी मुसीबतें और अधिक गंभीर थीं। इमरत बाई का बड़ा बेटा लालजी पूर्ण रूप से दिव्यांग है, जिसके कारण वह न तो अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है और न ही अपनी मां का हाथ बंटा सकता है। एक तरफ पति का साया सिर से उठ जाना, दूसरी तरफ दिव्यांग बेटे की देखरेख की जिम्मेदारी और ऊपर से अत्यधिक गरीबी ने इस परिवार की कमर तोड़ दी थी। सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि कुछ वर्ष पहले अचानक लगी एक भीषण आग की दुर्घटना में इस परिवार के सभी महत्वपूर्ण कागजात और दस्तावेज जलकर पूरी तरह राख हो गए थे। कागजात न होने के कारण यह परिवार सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना या विधवा पेंशन योजना का लाभ पाने से पूरी तरह वंचित रह गया था। प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेज न होने के कारण इन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही थी, जिससे इनका जीवन और अधिक नारकीय बन गया था।
पन्ना के पचास से अधिक समाजसेवियों ने किया श्रमदान
जब पन्ना जिले के इन जागरूक और संवेदनशील समाजसेवियों तक इस असहाय परिवार की दुर्दशा की खबर पहुंची, तो उनका दिल पसीज गया। उन्होंने इस परिवार की मदद करने का बीड़ा उठाया और एक ठोस योजना बनाई। इस मानवीय और पवित्र कार्य को पूरा करने के लिए पन्ना जिले के पचास से अधिक महिला और पुरुष समाजसेवी रविवार, तीस अगस्त को एकजुट होकर इटवा कला गांव पहुंचे। इन सभी ने मिलकर इस परिवार के लिए आवास निर्माण के वास्ते अपना अमूल्य श्रमदान किया। इन समाजसेवियों ने किसी पेशेवर मजदूर की तरह खुद आगे बढ़कर काम संभाला। किसी ने सीमेंट और मसाला बनाने का काम किया तो किसी ने ईंटें ढोकर दीवारों की जुड़ाई करने का कठिन कार्य निस्वार्थ भाव से पूरा किया। समाजसेवियों ने केवल श्रमदान ही नहीं किया, बल्कि इस परिवार को एक सुरक्षित, मजबूत और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देने के उद्देश्य से सीमेंट, रेत, गिट्टी और अन्य सभी आवश्यक निर्माण सामग्री भी अपनी ओर से पूरी तरह उपलब्ध कराई।
पक्के घर का सपना साकार होने पर भावुक हुआ परिवार
इस पूरे निर्माण कार्य के दौरान और उसके पूरा होने पर जब उस असहाय परिवार ने अपनी जर्जर झोपड़ी की जगह एक नया और मजबूत पक्का मकान बनते देखा, तो उनकी आंखें खुशी के आंसुओं से नम हो गईं। वर्षों तक अनिश्चितता और भय के साये में जीने वाला यह परिवार अब अपने जीवन के सबसे बड़े सपने को साकार होते देख बेहद भावुक हो गया। स्थानीय निवासी नरेश कुशवाहा (मड़ैयन) ने मीडिया और समाज के सामने इस पूरी स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि बरसों से एक बेहद जर्जर और असुरक्षित झोपड़ी में रहने को मजबूर यह परिवार अब राहत की सांस ले रहा है। समाजसेवियों की इस अद्भुत पहल ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज के सक्षम लोग ठान लें, तो किसी भी असहाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। पन्ना जिले के इस गांव में उठी इस मानवता की लहर ने एक बार फिर से यह दिखा दिया कि इंसानियत अभी भी जिंदा है और कठिन समय में एक-दूसरे की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
image source: https://www.bhaskar.com
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