मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से प्रशासनिक लाचारी और व्यवस्था की पोल खोलती हुई एक बेहद अनोखी और दिलचस्प खबर सामने आई है। पन्ना जिले के अंतर्गत आने वाले शाहनगर जनपद की परासी पंचायत के खर्रा गांव में ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट ही पड़ा। लंबे समय से खराब और जर्जर पड़ी सड़क की बदहाली से तंग आकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन का एक ऐसा अनोखा तरीका अपनाया जिसने सबको हैरान कर दिया। पन्ना जिले के इस ग्रामीण इलाके में ग्रामीणों ने कीचड़ से भरी बदहाल सड़क के बीचों-बीच धान की फसल की रोपाई कर डाली। भारी बारिश के बाद यह सड़क पूरी तरह से गहरे दलदल में तब्दील हो चुकी थी, जिससे इस रास्ते पर आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया था। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लगातार हो रही अनदेखी से बुरी तरह नाराज होकर ग्रामीणों ने यह कदम उठाया ताकि सोया हुआ प्रशासन जाग सके और उनकी इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान दे सके।

पन्ना जिले के शाहनगर जनपद के खर्रा गांव की घटना

यह पूरा अनोखा विरोध प्रदर्शन पन्ना जिले के शाहनगर जनपद के अंतर्गत आने वाली परासी पंचायत के खर्रा गांव में देखने को मिला है। पन्ना जिले के इस क्षेत्र में सड़क की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि वहां के रहवासियों का जीवन नारकीय बन गया है। खर्रा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विकास के बड़े-बड़े दावे सुने थे, लेकिन धरातल पर उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली यह सड़क पिछले कई वर्षों से अपनी बदहाली के आंसू रो रही है, लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण इस सड़क की स्थिति और अधिक भयानक हो गई है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं जो बारिश के पानी से भर गए हैं और पूरी सड़क कीचड़ से सनकर एक खतरनाक दलदल का रूप ले चुकी है, जिससे इस रास्ते पर चलना किसी खतरे से खाली नहीं रह गया है।

बारिश के बाद दलदल में बदली सड़क, आवागमन पूरी तरह ठप

ग्रामवासी राम किशन ने मीडिया और प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि यह अनोखा प्रदर्शन उनकी वर्षों पुरानी और अनसुनी समस्या का परिणाम है। लगातार हो रही बारिश के कारण खर्रा गांव की यह मुख्य सड़क पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि इस रास्ते पर पैदल चलना भी किसी खतरे से कम नहीं है और दोपहिया या चार पहिया वाहन तो दूर की बात, साइकिल तक इस कीचड़ भरे दलदल में धंस जाती है। सड़क की इस भयंकर बदहाली के कारण स्कूली छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बुजुर्ग घरों में ही कैद रहने को मजबूर हैं और यदि गांव में कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए, तो अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक गांव तक नहीं पहुंच पाती है। इस गंभीर समस्या के कारण पूरा खर्रा गांव बाहरी दुनिया से कट सा गया है, जिससे ग्रामीणों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और उनमें गहरा रोष व्याप्त है।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

ग्रामीण रैदास आदिवासी ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी इस बदहाल सड़क को ठीक कराने के लिए पिछले कई सालों में अनगिनत बार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई थी। उन्होंने न जाने कितने चक्कर काटे और लिखित में आवेदन दिए, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठे आश्वासन ही मिले और जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी इस गंभीर समस्या की ओर देखना तक मुनासिब नहीं समझा। इसी बात से तंग आकर और व्यवस्था के खिलाफ अपना कड़ा संदेश देने के लिए ग्रामीणों ने यह अनूठा रास्ता चुना। ग्रामीणों ने कीचड़ से सनी सड़क पर धान की रोपाई करके बेहद तीखा और तार्किक सवाल उठाया है कि जब यह सड़क चलने लायक ही नहीं बची है और इस पर पैदल चलना भी असंभव है, तो क्यों न इस बंजर और कीचड़ भरी जमीन पर धान की फसल ही उगाई जाए।

प्रशासन की नींद टूटने का इंतजार कर रहे हैं ग्रामीण

पन्ना जिले के खर्रा गांव के इन ग्रामीणों द्वारा किए गए इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की गूंज अब पूरे इलाके में सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय प्रशासनिक गलियारों तक इस बात की चर्चा हो रही है कि किस प्रकार ग्रामीणों ने अनोखे तरीके से शासन-प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज कराया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि इस जन-आंदोलन और अनोखे प्रदर्शन के बाद पन्ना जिले का स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब अपनी आंखें खोलता है और खर्रा गांव की इस बदहाल सड़क के दिन कब बहुरते हैं। ग्रामीण अभी भी इस उम्मीद में हैं कि शायद अब प्रशासन नींद से जागेगा और उनकी इस सड़क का पक्का निर्माण कराएगा ताकि उन्हें रोज-रोज की इस कीचड़ भरी मुसीबत से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके और उनका आवागमन सुगम हो सके।

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