मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के देवेंद्रनगर क्षेत्र में एक अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजाति के वन्यजीव की खोज ने प्रकृति प्रेमियों और वन विभाग का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 12 के निवासी किसान महेंद्र प्रजापति के खेत में एक 'भारतीय तारा कछुआ' (Indian Star Tortoise) पाया गया। इस अनूठे जीव की पहचान करने में किसान की सजगता और उसे सुरक्षित बचाने में वन विभाग की त्वरित तत्परता ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के प्रति स्थानीय लोगों की संवेदनशीलता को सिद्ध किया है। अपनी अद्भुत शारीरिक बनावट और सुंदरता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध तस्करी की भेंट चढ़ने वाले इस जीव का सुरक्षित मिलना पन्ना जिले के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

इस घटना के विभिन्न पहलुओं और रेस्क्यू ऑपरेशन से संबंधित विस्तृत विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

1. दुर्लभ प्रजाति और किसान की सजगता: देवेंद्रनगर के किसान महेंद्र प्रजापति अपने खेत में दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी उनकी नजर एक असामान्य जीव पर पड़ी। कछुए की पीठ पर बनी अद्भुत और कलात्मक आकृतियों ने उन्हें रुकने पर मजबूर कर दिया। किसान ने देखा कि कछुए के खोल (पीठ) पर पीले रंग की धारियां बनी हुई हैं, जो अंधेरे में चमकते हुए तारों के समूह जैसी प्रतीत होती हैं। इसी अद्वितीय विशेषता के कारण इसे 'स्टार टॉर्टॉइज़' या 'भारतीय तारा कछुआ' कहा जाता है। वैज्ञानिक शब्दावली में इस प्रजाति को जियोकलोंन एलिगेंस (Geoclon elegans) के नाम से जाना जाता है, जो अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है।

2. त्वरित सूचना तंत्र और वन विभाग की सक्रियता: किसान महेंद्र प्रजापति ने बिना किसी देरी के अपनी नागरिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए सीबीएमओ डॉ. अभिषेक जैन को इसकी सूचना दी। डॉ. जैन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल यह जानकारी वन विभाग के बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय तक पहुंचाई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने बिना एक पल गंवाए घटनास्थल के लिए प्रस्थान किया। मौके पर पहुंचकर टीम ने कछुए की स्थिति का जायजा लिया और उसे सुरक्षित तरीके से अपने संरक्षण में ले लिया। सुरक्षा के दृष्टिगत विभाग ने इस घटना का विधिवत पंचनामा भी तैयार किया।

3. सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के नायक: इस महत्वपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन में वन विभाग की टीम ने अत्यंत पेशेवर तरीके से कार्य किया। बीट प्रभारी शारदा प्रसाद राय के नेतृत्व में इस दल में वन सुरक्षा श्रमिक रघुवीर सिंह, विश्राम सिंह, राजेश यादव और रामसिंह शामिल थे। इन सभी के समन्वित प्रयासों से ही इस संकटग्रस्त जीव को किसी भी प्रकार की हानि पहुँचाए बिना सुरक्षित रेस्क्यू किया जाना संभव हो पाया।

4. तस्करी का शिकार और इसकी घटती संख्या: वन परिक्षेत्र अधिकारी शुभम तिवारी ने इस प्रजाति के व्यवहार और खतरों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय तारा कछुआ स्वभाव से अत्यंत शांत होता है। यह जीव मुख्य रूप से सूखे घास के मैदानों और घनी झाड़ियों वाले जंगलों में अपना बसेरा बनाता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसकी बेमिसाल सुंदरता ही इसके लिए अभिशाप बन गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पालतू जानवरों की अवैध तस्करी (Illegal Wildlife Trade) में इसकी भारी मांग है, जिसके कारण इन कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास से चुरा लिया जाता है। यही कारण है कि इनकी संख्या पूरे देश में तेजी से घट रही है।

5. अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की श्रेणी (IUCN Status): इस कछुए की वैश्विक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने इसे 'रेड लिस्ट' (Red List) में शामिल किया है, जो इसे संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में रखने की पुष्टि करता है। भारत सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत इस प्रजाति को अत्यधिक सुरक्षा प्रदान की गई है। इन कछुओं का जीवनकाल आमतौर पर 30 से 50 वर्ष तक का होता है, और इतने लंबे जीवनकाल में भी इनका संरक्षण करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

6. वन्यजीव संरक्षण के लिए एक सबक: पन्ना जिले के देवेंद्रनगर में हुई यह घटना न केवल वन विभाग की मुस्तैदी का प्रमाण है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए भी एक बड़ा सबक है। यदि हर किसान और नागरिक अपने आसपास के वातावरण में रहने वाले दुर्लभ जीवों के प्रति इसी तरह सजग हो जाए, तो लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाया जा सकता है। वन विभाग ने इस कछुए को स्वास्थ्य परीक्षण के पश्चात उचित प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि यह जीव पुनः अपनी आजादी के साथ जीवन व्यतीत कर सके।

पन्ना प्रशासन और स्थानीय निवासियों का यह साझा प्रयास वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और प्रेम को दर्शाता है। भारतीय तारा कछुआ का मिलना यह सिद्ध करता है कि पन्ना के जंगल अभी भी समृद्ध जैव-विविधता का केंद्र हैं, जिसे बचाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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