मध्य प्रदेश के पन्ना जिले सहित पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के चरमराने के आसार बढ़ गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत लगभग 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए चरणबद्ध आंदोलन का आगाज कर दिया है। पन्ना जिला इकाई के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस सिलसिले में शुक्रवार को जिला प्रशासन के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की। संघ के सदस्यों ने पन्ना कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को ज्ञापन सौंपकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 2 जून से जिले के सभी संविदा कर्मचारी पूर्णतः हड़ताल पर चले जाएंगे।

क्यों शुरू हुआ यह आंदोलन?

संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वे बीते कई वर्षों से अत्यंत कठिन परिस्थितियों में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं। संघ के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सजनीश शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि NHM के माध्यम से 32 हजार कर्मचारी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आम जनता को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बावजूद, उनकी बुनियादी मांगों को लगातार अनदेखा किया जाना उनके साथ अन्याय है।

संघ ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में की गई घोषणाएं और विभिन्न बैठकों में दी गई सहमतियां केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। एक वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बाद भी शासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण कर्मचारियों में भारी रोष है। इस हड़ताल की चेतावनी के साथ संघ ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने से आम जनता को कोई भी असुविधा होती है, तो इसकी संपूर्ण नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

जिलाध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की प्रमुख मांगों को सूचीबद्ध करते हुए विस्तार से जानकारी दी। कर्मचारियों की मांगों में शामिल हैं:

  • नियमितीकरण का लाभ: 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान (टीटी नगर) में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप समस्त NHM संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ प्रदान किया जाए।

  • बीमा और पेंशन: सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत कर्मचारियों को NPS (राष्ट्रीय पेंशन योजना) और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा सुनिश्चित की जाए।

  • वेतन विसंगति का सुधार: शासन द्वारा उत्पन्न की गई वेतन विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाए और जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक 'समान कार्य के लिए समान वेतन' की नीति लागू की जाए।

  • वार्षिक वेतन वृद्धि: अन्य राज्यों की तर्ज पर कर्मचारियों को 10 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ मिले।

  • अन्य सुविधाएं: नियमित कर्मचारियों की भांति संविदा कर्मियों को भी महंगाई भत्ता (DA) और अर्जित अवकाश (Leave) की पात्रता दी जाए। इसके अलावा, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के वेतन में PBI का समायोजन किया जाए।

आंदोलन की रूपरेखा: ज्ञापन से घेराव तक

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने अपने आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है:

  1. प्रारंभिक विरोध: आंदोलन की शुरुआत के तहत 25 मई से 27 मई तक जिले के समस्त कर्मचारियों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

  2. प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन: शुक्रवार को जिले के समस्त बीएमओ (BMO), सीएमएचओ (CMHO) और कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराया गया।

  3. जनप्रतिनिधियों से संवाद: आगामी 31 मई से 1 जून के बीच कर्मचारी अपने क्षेत्र के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से मिलकर अपनी पीड़ा साझा करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे।

  4. पूर्ण बहिष्कार: यदि सरकार का रुख सकारात्मक नहीं रहता है, तो 2 जून से सभी कर्मचारी अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

  5. भोपाल में बड़ा प्रदर्शन: आंदोलन के अंतिम चरण में 8 जून को प्रदेश भर के तमाम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी राजधानी भोपाल में एकत्र होंगे और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाला असर

पन्ना जिले में यदि 2 जून से संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने काम बंद कर दिया, तो जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, ओपीडी संचालन और रिकॉर्ड संधारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं। संविदा कर्मियों की संख्या अधिक होने के कारण अस्पतालों में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग पहले ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर संविदा कर्मियों की हड़ताल व्यवस्था को पंगु बना सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अल्टीमेटम के बाद क्या कदम उठाता है। क्या सरकार हड़ताल शुरू होने से पहले कोई सार्थक बातचीत का रास्ता निकालती है, या फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था एक और बड़े हड़ताली संकट की ओर बढ़ेगी? कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अपनी मांगों के निराकरण से कम पर कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

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