मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक अत्यंत विचलित कर देने वाली और पारिवारिक रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। पन्ना जिले के नयापुरवा स्थित एनएमडीसी (NMDC) कॉलोनी में सोमवार को एक भाई-बहन के बीच हुआ मामूली विवाद इतना हिंसक हो गया कि उसने जानलेवा रूप ले लिया। एक बहन ने अपने ही सगे भाई को लोहे की रॉड और भारी पत्थरों से बेरहमी से पीटा, जिससे भाई के पैर टूट गए और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित की नाजुक हालत को देखते हुए उसे पन्ना जिला अस्पताल से रीवा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया है।

घटना का विवरण: सोते हुए भाई पर किया घातक प्रहार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित 38 वर्षीय कमलेश आदिवासी अपने घर में सो रहा था। उसी दौरान उसकी सगी बहन रूपा ने अचानक उस पर हमला कर दिया। रूपा ने घर में मौजूद लोहे की रॉड और भारी पत्थरों का इस्तेमाल किया। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कमलेश पूरी तरह असहाय हो गया। रॉड के वार से कमलेश का पैर बुरी तरह टूट गया, जबकि पत्थरों के प्रहार से उसके हाथ, कंधे और शरीर के अन्य संवेदनशील अंगों पर गहरे घाव हो गए।

कमलेश ने किसी तरह अपनी जान बचाई और खून से लथपथ हालत में अपने पड़ोसी भरत के घर की ओर भागा। उसने पड़ोसियों से मदद की गुहार लगाई। पड़ोसी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत 'डायल 112' पर फोन करके पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और लहूलुहान अवस्था में पड़े कमलेश को उपचार के लिए पन्ना के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर करने का निर्णय लिया।

विवाद की जड़: बकरियों को बेचना बना कारण

अस्पताल में भर्ती होने के बाद पीड़ित कमलेश ने घटना के पीछे के कारणों का खुलासा किया। उसने बताया कि यह खूनी संघर्ष केवल 6 बकरियों को बेचने के कारण शुरू हुआ। कमलेश के अनुसार, ये बकरियां ही उसकी आजीविका का एकमात्र साधन थीं। उसकी बहन रूपा ने उसकी जानकारी के बिना ही उन सभी 6 बकरियों को बाजार में बेच दिया था। जब कमलेश को इस बात का पता चला और उसने अपनी रोजी-रोटी को बेचने का विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया। बहन ने विरोध को बर्दाश्त करने के बजाय अपने भाई को ही सबक सिखाने की ठान ली और उस पर हिंसक हमला कर दिया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और विवाद के अन्य आयाम

इस घटना के बाद कमलेश ने अपनी पारिवारिक स्थिति के बारे में भी जानकारी दी। उसने बताया कि उनके माता-पिता का पूर्व में ही निधन हो चुका है, जिसके चलते घर में वे दोनों भाई-बहन ही शेष बचे थे। बहन रूपा की शादी हो चुकी थी और उसके तीन बच्चे भी हैं। हालांकि, वह अपने पति को छोड़कर लंबे समय से जबरन मायके में आकर रहने लगी थी।

कमलेश का आरोप है कि बहन के मायके में जबरन रहने और उसके व्यवहार से घर में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी। भाई के बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि बकरियों का बिकना केवल तात्कालिक कारण था, जबकि आपसी कलह और मनमुटाव का इतिहास पुराना था। बहन के इस हिंसक व्यवहार ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। लोगों का कहना है कि एक बहन का अपने भाई के प्रति इतना क्रूर होना अकल्पनीय है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद पन्ना पुलिस सक्रिय हो गई थी। घायल कमलेश के बयानों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि घायल के बयान और मौके पर मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोपी महिला रूपा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले में क्या और भी लोग शामिल थे या यह पूरी तरह से एकतरफा कृत्य था।

समाज के लिए एक चिंताजनक संदेश

पन्ना की यह घटना एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों में आ रही दरारों को उजागर करती है। आर्थिक अभाव और आपसी अहं की लड़ाई में किस तरह खून के रिश्ते एक-दूसरे के दुश्मन बन रहे हैं, यह समाज के लिए एक चिंता का विषय है। एक भाई की आजीविका को नष्ट कर देना और फिर उस पर जानलेवा हमला करना, यह दर्शाता है कि आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की परंपरा खत्म होती जा रही है।

प्रशासन और समाज के प्रबुद्ध वर्ग को ऐसी घटनाओं से सबक लेने की आवश्यकता है। परिवार परामर्श केंद्रों की भूमिका यहाँ और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि ऐसे तनावपूर्ण घरेलू विवादों को समय रहते सुलझाया जा सके और किसी की जान जोखिम में न पड़े। फिलहाल, पूरा इलाका इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है और कमलेश के जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन रिश्तों की यह क्षति शायद ही कभी पूरी हो सकेगी।

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