पन्ना के कई घरों में शाम को एक ही खींचतान होती है: मोबाइल किसके हाथ में रहेगा। बच्चे को DIKSHA पर पाठ देखना है, और मां-बाप को डर है कि वह रील और गेम में न खो जाए।

इसी सवाल पर जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच का अहम आदेश आया है। LawTrend के मुताबिक कोर्ट ने लिखा: 'हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं।' मामला असल में बच्चों के यौन शोषण वाली ऑनलाइन सामग्री (CSEAM) रोकने का है।

एक नज़र में: सुप्रीम कोर्ट का आदेश
क्याजानकारीमतलब
केसJRC Alliance बनाम S. Harish2024 के केस में अर्जी
बेंचजस्टिस पारदीवाला, चंद्रनदो जजों की बेंच
आदेश15 अक्टूबर 2026136 पेज
अधिकारअनुच्छेद 21, 19(1)(a)बच्चे भी शामिल
उम्र पर रोकपूरी रोक नहींचाइल्ड मोड सुझाया
अगली सुनवाई10 दिसंबर 2026केंद्र की रिपोर्ट

1. कोर्ट ने असल में क्या कहा

रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने इंटरनेट तक पहुंच को अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार माना। LawTrend के अनुसार कोर्ट ने कहा: 'हमारे बच्चों को भी, उनकी उम्र चाहे जो भी हो, समान अधिकार प्राप्त हैं।' Bar & Bench के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि प्लेटफॉर्म की नाकामी पर बच्चे को इंटरनेट से दूर रखना पीड़ित को ही समस्या मानना होगा।

2. पूरी रोक क्यों नहीं, तो फिर क्या

रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि किसी देश ने साबित नहीं किया कि पूरी रोक से बच्चे ज्यादा सुरक्षित हुए। रोक से बच्चे कम निगरानी वाले ऐप पर जा सकते हैं और धमकी की बात छुपा सकते हैं। हर यूज़र की उम्र जांचने में निजी डेटा जुटाना पड़ेगा, जिसे कोर्ट ने निजता के लिए खतरा माना।

इसकी जगह कोर्ट ने माता-पिता की सहमति और निगरानी सुझाई, और छोटे बच्चों के लिए 'चाइल्ड मोड', जिसमें खाता अपने आप प्राइवेट रहे और अनजान वयस्कों का संपर्क सीमित हो। तरीका केंद्र तय करेगा।

3. कंपनियों पर सख्ती

LawBeat के मुताबिक केंद्र राष्ट्रीय हैश और URL डेटाबेस बनाएगा, जिसमें दर्ज सामग्री प्लेटफॉर्म तुरंत हटाएंगे। नई सामग्री हटाने के 2 घंटे में पुलिस या साइबर पोर्टल को रिपोर्ट करनी होगी, और शिकायत की पावती 24 घंटे में ट्रैकिंग नंबर के साथ देनी होगी।

4. स्कूल और पढ़ाई पर असर

रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि डिजिटल सुरक्षा और उम्र के हिसाब से यौन शिक्षा स्कूल पाठ्यक्रम में हो, जिसे NCERT और SCERT तैयार करें। स्कूलों में 1098 और 1930 की जानकारी लगे। पन्ना में छात्रवृत्ति और कई परीक्षाओं के फॉर्म ऑनलाइन भरे जाते हैं, इसलिए यह यहां सीधे काम की बात है। केरल हाईकोर्ट ने 2019 के फहीमा शिरीन मामले में भी इंटरनेट तक पहुंच को शिक्षा और निजता के अधिकार का हिस्सा माना था।

5. DPDP कानून और माता-पिता की सहमति

DPDP कानून 2023 में 18 साल से कम उम्र वाले को बच्चा माना गया है। 14 नवंबर 2025 के DPDP नियमों का नियम 10 कहता है कि बच्चे का डेटा लेने से पहले माता-पिता की सत्यापित सहमति ली जाए। यह नियम 18 महीने बाद, यानी मई 2027 के आसपास लागू होना है।

माता-पिता आज ही करें ये 5 काम

  1. Android फोन में Google Family Link से स्क्रीन टाइम तय करें।
  2. छोटे बच्चे को YouTube Kids जैसा ऐप दें, खाते प्राइवेट रखें।
  3. 1930 और 1098 घर में लिखकर रखें।
  4. बच्चे से कहें: कोई डराए तो बिना डर के बताए।
  5. OTP और पासवर्ड किसी को न दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: क्या अब बच्चों पर कोई रोक नहीं लग सकती?

उत्तर: नहीं। पूरी रोक को गलत माना, पर निगरानी और चाइल्ड मोड को सही बताया।

प्रश्न: क्या माता-पिता फोन के नियम बना सकते हैं?

उत्तर: हां, कोर्ट ने माता-पिता के मार्गदर्शन पर ही जोर दिया है।

प्रश्न: चाइल्ड मोड कब आएगा?

उत्तर: तरीका केंद्र तय करेगा, अभी कोई तारीख नहीं है।

प्रश्न: ऑनलाइन कुछ गलत हो तो?

उत्तर: 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत करें या 1098 पर मदद लें।

प्रश्न: क्या यह अंतिम फैसला है?

उत्तर: नहीं, मामला चल रहा है। अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को है।

यह खबर 18 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आदेश का पूरा पाठ सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट (sci.gov.in) पर देखें।