पन्ना जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खोरा के दानीपुरवा गांव से एक अत्यंत ही मार्मिक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को एक महिला के अंतिम संस्कार के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गांव में पक्का शमशान घाट और टीन शेड न होने के कारण परिजनों को खुले आसमान के नीचे तिरपाल और पन्नी का सहारा लेकर चिता को बचाते हुए अंतिम संस्कार करना पड़ा। इस अमानवीय स्थिति ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।
दुखद प्रसंग और पृष्ठभूमि
यह पूरी घटना पन्ना जिले के दानीपुरवा गांव की है, जो कि बुधवार, 2 सितंबर को घटित हुई। गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक चुनवाद सिंह की छोटी बहू का अचानक निधन हो गया था, जिससे पूरे परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई थी। जब परिजन और ग्रामीण मृतका के अंतिम संस्कार के लिए पारंपरिक रूप से शमशान घाट की ओर जाने लगे, तो उन्हें पता चला कि गांव में अंतिम संस्कार के लिए कोई भी सुरक्षित या पक्की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
खुले मैदान में चिता सजाने की मजबूरी
शमशान घाट जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को गांव के ही एक खुले मैदान में लकड़ी एकत्रित कर चिता सजानी पड़ी। मजबूरी में परिजनों को शव को खुले में रखकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। ग्रामीण लंबे समय से इस क्षेत्र में शमशान घाट के निर्माण की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बारिश के बीच कठिनाइयों का दौर
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल ही रही थी कि इसी दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के तेज पानी से चिता के बुझने का खतरा पैदा हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शोकाकुल परिजनों और ग्रामीणों ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और चिता के ऊपर प्लास्टिक की पन्नी और तिरपाल तान दी। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और बारिश के बीच संघर्ष करते हुए जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की विधि को पूरा किया जा सका।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा और आक्रोश
इस दर्दनाक घटना का वीडियो और तस्वीरें जब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सामने आईं, तो पूरे क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गांव वालों ने स्थानीय सरपंच, पंचायत सचिव और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारें और प्रशासन भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे और वादे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इंसान को जीवित तो क्या, मरने के बाद भी ढंग से दो गज जमीन और छत नसीब नहीं हो रही है।
प्रशासन को चेतावनी और आंदोलन की हुंकार
दानीपुरवा गांव के लोगों ने इस घटना के बाद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और संबंधित पंचायत ने जल्द से जल्द इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया और दानीपुरवा में पक्के शमशान घाट व टीन शेड का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया, तो वे मजबूरन बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों की इस मांग ने एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
image source: https://www.bhaskar.com
Continue With Google