बनहरीकला टपरिया में बांध के डूब क्षेत्र के पास 11 सितंबर से धरना चल रहा था। बारिश में पानी घरों तक आया, फिर भी लोग चिता, जल और मिट्टी सत्याग्रह करते रहे। गांव वालों की एक ही बात रही: "पैलें पूरो मुआवजा, फिर डूब।"
सागर संभाग के कमिश्नर दिलीप कुमार ने बालूपुर और कुंवरपुर के प्रभावित परिवारों को 10 अक्टूबर तक मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने गांवों में राशि बांटना शुरू किया।
1. बांध से किसे पानी, किसे विस्थापन
ग्राउंड रिपोर्ट ने जल संसाधन विभाग के एक दस्तावेज के हवाले से लिखा है कि परियोजना से अजयगढ़ तहसील के करीब 38 गांवों को सिंचाई मिलनी है। इसके लिए करीब 1,523 हेक्टेयर जमीन चाहिए, जिसमें 930 हेक्टेयर से ज्यादा खेती की जमीन है।
यानी एक तरफ 38 गांवों के खेतों तक पानी पहुंचने की उम्मीद है, दूसरी तरफ डूब में आने वाले परिवारों का घर और खेत छूट रहा है।
2. पैकेज 12.5 लाख, शिकायत 5 लाख की
राज्य कैबिनेट ने पन्ना के लिए 202.50 करोड़ रुपये अतिरिक्त मंजूर किए और पैकेज 5 लाख से बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये किया। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कुछ परिवारों को अब तक करीब 5 लाख ही मिले हैं और मकान, कुएं, पेड़ जैसी संपत्ति का भुगतान कई मामलों में बाकी है।
3. प्रशासन ने क्या कहा
तत्कालीन कलेक्टर उषा परमार ने बनहरीकला और कुंवरपुर जाकर आवेदन लिए। उन्होंने कहा, "प्रत्येक पात्र विस्थापितों को निश्चित रूप से मुआवजा एवं अतिरिक्त मुआवजा राशि मिलेगी।" तहसील कार्यालय में विशेष सुनवाई प्रकोष्ठ बनाने की बात भी कही गई।
रॉयटर्स की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट में उषा परमार के हवाले से कहा गया कि 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रभावितों को भुगतान हो चुका है। प्रशासन नया सर्वे भी करा रहा है।
4. 10 अक्टूबर के बाद क्या बदला
14 अक्टूबर की तबादला सूची में उषा परमार को मंत्रालय भेजा गया और बुरहानपुर के कलेक्टर हर्ष सिंह को पन्ना का कलेक्टर बनाया गया। बचे हुए भुगतान, नए सर्वे और सुनवाई प्रकोष्ठ के काम पर अब नए कलेक्टर का रुख अहम होगा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के अमित भटनागर और कई प्रभावितों ने 30 सितंबर को हनुमतपुर चौकी पर गिरफ्तारी दी थी। संगठन की मांग है कि पूरा मुआवजा और पुनर्वास होने के बाद ही विस्थापन हो।
प्रभावित परिवार आज ही कर लें ये 5 काम
- तहसील में सर्वे सूची में अपना नाम और रकबा जांचें।
- खसरा, B-1, आधार और बैंक पासबुक की कॉपी तैयार रखें।
- मकान, कुआं, पेड़ का ब्योरा अलग आवेदन में लिखें।
- हर आवेदन की पावती लेकर संभालें।
- जलभराव से हुए नुकसान की सूचना पटवारी को दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: मझगांय परियोजना कहां है?
उत्तर: पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील में, यह मध्यम सिंचाई परियोजना है।
प्रश्न: पुनर्वास पैकेज कितना है?
उत्तर: 5 लाख से बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये किया गया।
प्रश्न: मुआवजे की मियाद क्या थी?
उत्तर: कमिश्नर के निर्देश के मुताबिक 10 अक्टूबर 2026।
प्रश्न: नाम छूट गया तो क्या करें?
उत्तर: तहसील कार्यालय में लिखित आवेदन दें और पावती लें।
यह खबर 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। अपने भुगतान की स्थिति तहसील कार्यालय अजयगढ़ या कलेक्टर कार्यालय पन्ना से पक्की करें।
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