पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अंतर्गत मझगांया के बहनहरीकला टपरियन में केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य विकास परियोजनाओं के विस्थापितों और प्रभावितों के अधिकारों को लेकर चल रहा ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को 26वें दिन भी अनवरत जारी रहा। परियोजना प्रभावित परिवारों के उचित मुआवजे और पूर्ण पुनर्वास की बुनियादी मांग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से आंदोलन की राह पर हैं। प्रशासन द्वारा की गई कड़ी कार्रवाइयों और दबाव के बावजूद प्रभावितों का हौसला नहीं टूटा है और अब इस ऐतिहासिक आंदोलन की मुख्य बागडोर क्षेत्र की महिलाओं ने अपने हाथों में ले ली है। वहीं दूसरी ओर, जय किसान संगठन के प्रमुख नेता अमित भटनागर का आमरण अनशन भी जेल और अस्पताल की सीमाओं को पार करते हुए लगातार 11वें दिन जारी है।

पन्ना जेल से रीवा मेडिकल कॉलेज तक का पूरा घटनाक्रम

जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और जेल विभाग की कार्यप्रणाली पर अत्यंत गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। भटनागर के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान 30 सितंबर को प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और पन्ना जिला जेल भेज दिया था। जेल में रहते हुए भी उन्होंने किसानों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए अपना आमरण अनशन जारी रखा।

उन्होंने आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर की रात को प्रशासनिक तंत्र द्वारा एक फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिसके आधार पर उन्हें पन्ना से रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। भटनागर का कहना है कि उन्हें हृदय संबंधी कोई बीमारी नहीं थी, फिर भी दिल की बीमारी का बहाना बनाकर उन्हें रीवा भेजा गया।

रीवा अस्पताल पहुंचने पर जब डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य जांच की, तो सभी चिकित्सकीय रिपोर्ट सामान्य पाई गईं। इस पर डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करने से स्पष्ट मना कर दिया था। इसके बावजूद, प्रशासनिक अधिकारियों ने कथित रूप से डॉक्टरों पर दबाव बनाया और ‘ऊपर से फोन आया है’ का हवाला देकर उन्हें जबरन आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में भर्ती करवाया गया।

अनशन तुड़वाने के लिए दबाव और धमकियों का आरोप

अमित भटनागर ने आईसीयू में उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर भी कई गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 5 और 6 अक्टूबर की दरमियानी रात को उन पर अनशन समाप्त करने के लिए भारी प्रशासनिक दबाव बनाया गया। उन्हें तरह-तरह की धमकियां दी गईं ताकि वे अपना आंदोलन वापस ले लें।

इतना ही नहीं, अनशन के दौरान बुनियादी मानवीय जरूरतों की भी उपेक्षा की गई और उन्हें पीने का पानी तथा नींबू तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

भटनागर ने प्रशासनिक दोहरे रवैये पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनकी शारीरिक हालत इतनी ही नाजुक और गंभीर थी कि उन्हें जबरन आईसीयू में रखना पड़ा, तो फिर अदालत से जमानत मिलते ही डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत आईसीयू से छुट्टी कैसे दे दी? उन्होंने कहा कि लंबे अनशन के कारण उनके शरीर में शारीरिक कमजोरी जरूर आ गई है, लेकिन किसानों और गरीबों के हक की लड़ाई को लेकर उनका आत्मबल और संकल्प पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।

बातचीत के बजाय दमन का रास्ता अपनाने का आरोप

किसान नेता अमित भटनागर ने प्रशासन के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि अगर पन्ना जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) और अन्य जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचते और प्रभावित किसानों तथा आदिवासियों के बीच बैठकर सीधी बातचीत करते, तो यह अनशन और गतिरोध बहुत पहले ही सुलझ सकता था।

उन्होंने गहरा खेद व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन ने संवाद स्थापित करने के बजाय दमन और गिरफ्तारी का रास्ता चुना।

इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन द्वारा गांव-गांव जाकर विस्थापितों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी बुनियादी सवाल खड़े किए। भटनागर ने कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम 2013 की धारा 38 के तहत डूब क्षेत्र बनने से कम से कम छह महीने पूर्व प्रभावितों के पुनर्वास और विस्थापन की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी करना संबंधित जिले के कलेक्टर की वैधानिक जिम्मेदारी है, जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।

महिलाओं ने संभाली कमान, आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन

प्रशासनिक सख्ती और नेता की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन कमजोर पड़ने के बजाय और अधिक संगठित हो गया है। मझगांया के बहनहरीकला टपरियन में अब स्थानीय ग्रामीण महिलाओं ने आंदोलन का मोर्चा संभाल लिया है और धरना स्थल पर डटकर बैठ गई हैं।

इस आंदोलन को सामाजिक स्तर पर भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। छतरपुर की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता राजलक्ष्मी कुशवाहा सहित कई अन्य समाजसेवियों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर महिलाओं और प्रभावितों के प्रति अपना खुला समर्थन जताया है। विभिन्न जनसंगठनों के जुड़ने से आंदोलन को नई ऊर्जा मिल रही है।

पन्ना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भ्रष्टाचार उजागर करने का ऐलान

अमित भटनागर ने स्पष्ट किया कि उनका यह सत्याग्रह जेल की सलाखों के पीछे और अस्पताल के वार्डों में भी बदस्तूर जारी रहा और आगे भी चलता रहेगा। उन्होंने ऐलान किया है कि वे शीघ्र ही पन्ना जिला मुख्यालय पहुंचेंगे और वहां एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेंगे।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वे परियोजनाओं में हुए कथित भारी भ्रष्टाचार, भू-अर्जन की प्रक्रिया में की गई प्रशासनिक गड़बड़ियों और विस्थापितों व प्रभावितों के अधिकारों के हनन से जुड़े सभी पुख्ता दस्तावेज जनता और मीडिया के सामने सार्वजनिक करेंगे।

पन्ना जिले के मझगांया में चल रहा यह ‘चिता आंदोलन’ अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुका है और आंदोलनकारी अपनी मांगों के पूर्ण समाधान तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।



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