पन्ना जिले में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) और साझा चूल्हा योजना का संचालन करने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं और रसोइयों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। पिछले कई महीनों से लगातार मानदेय, आवश्यक अनाज और खर्च की राशि न मिलने के कारण इन महिलाओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इसी नाराजगी के चलते महिलाओं ने 15 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत कर दी है, जिससे व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

  • कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन राष्ट्रीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ (पन्ना) के बैनर तले दर्जनों महिलाएं एकजुट हुईं और सोमवार 21 सितंबर को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद की। इन महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी लंबित मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक स्कूलों और केंद्रों में चूल्हा नहीं जलेगा और बच्चों के लिए भोजन नहीं पकाया जाएगा।

  • कर्ज के दलदल में फंसीं रसोइया बहनें और स्व सहायता समूह प्रदर्शन के दौरान जिला संगठन मंत्री रजनी उरमलिया ने शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले 3 से 4 महीनों से न तो रसोइयों को उनका तय मानदेय मिला है और न ही भोजन पकाने के लिए आवश्यक अनाज व धनराशि आवंटित की गई है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि समूह का संचालन करने वाली और रसोइया बहनें अपनी जेब से पैसे खर्च करने के बाद अब बाजार से कर्ज लेकर किसी तरह काम चला रही थीं।

  • दुकानों से उधार मिलना बंद और पारिवारिक कलह स्थानीय दुकानदारों से अब राशन और सामान के लिए उधार मिलना भी पूरी तरह बंद हो चुका है। लगातार आर्थिक तंगी और भुखमरी जैसे हालात के कारण इन महिलाओं के अपने पतियों और परिवार के सदस्यों के साथ घरेलू झगड़े भी होने लगे हैं। रजनी उरमलिया ने दृढ़ता से साफ किया है कि जब तक उनका एक-एक पाई बकाया पैसा और अनाज नहीं मिल जाता, यह अनिश्चितकालीन हड़ताल निरंतर जारी रहेगी।

  • सरकार द्वारा अनदेखी किए जाने का आरोप संगठन सचिव सुषमा ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे अपनी समस्याओं को लेकर बार-बार ज्ञापन सौंप चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे किसी भी स्थिति में खाना बनाना शुरू नहीं करेंगी और अपने हक के लिए आगे भी लंबी लड़ाई लड़ती रहेंगी।

  • ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें और बिंदु कलेक्ट्रेट में सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से महिलाओं ने कई महत्वपूर्ण और न्यायसंगत मांगें रखी हैं:

  1. रसोइया बहनों के पिछले 3 महीने के बकाया मानदेय का तुरंत और एकमुश्त भुगतान किया जाए।

  2. मध्याह्न भोजन और साझा चूल्हा योजना का कम से कम 2 महीने का बकाया अनाज और खर्च का पैसा तुरंत दिलाया जाए।

  3. टेक होम राशन (THR) का अनाज पूरी तरह अलग से दिया जाए और इसे बच्चों के पोषण आहार के साथ बिल्कुल न मिलाया जाए।

  4. पोर्टल पर दर्ज वास्तविक बच्चों की संख्या के आधार पर ही अनाज और भोजन खर्च की राशि आवंटित की जाए।

  5. साझा चूल्हा योजना के तहत काम करने वाली रसोइयों का मानदेय ₹500 प्रतिमाह से बढ़ाकर तुरंत ₹2000 किया जाए।

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