पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना और सतना जिले की सीमा पर स्थित पर्यटन स्थल 'बृहस्पति कुंड' जलप्रपात एक बार फिर दुखद हादसे का गवाह बना है। बिहार के समस्तीपुर जिले के निवासी और नर्सिंग के छात्र कुणाल कुमार ठाकुर (28) की कुंड के गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। मंगलवार शाम से लापता युवक का शव करीब 36 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार सुबह कुंड से बरामद किया गया। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के लचर इंतजामों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
घटना का विवरण और सर्च ऑपरेशन मिली जानकारी के अनुसार, कुणाल कुमार ठाकुर मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे अपने चार-पांच मित्रों के साथ बृहस्पति कुंड जलप्रपात पर घूमने आए थे। यह स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां की गहराई और फिसलन भरी चट्टानें जानलेवा साबित होती रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी के करीब जाने पर कुणाल का पैर फिसल गया या संतुलन बिगड़ने से वह सीधे गहरे कुंड में जा गिरे। उनके दोस्तों ने मदद का प्रयास किया, लेकिन कुंड की गहराई अधिक होने के कारण वे उसे बचा न सके। घटना सतना जिले के बरौंधा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: पन्ना टीम की तत्परता हादसे के बाद प्रशासन को सूचना दी गई, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू हुआ। हालांकि, घटना स्थल सतना जिले की सीमा में होने के बावजूद, शुरुआती घंटों में सतना की बचाव टीम मौके पर नहीं पहुँच सकी, जिससे तलाश में देरी हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पन्ना की रेस्क्यू टीम ने कमान संभाली। पीसी सत्यपाल जैन के नेतृत्व में सैनिक बारेलाल, बृजेन्द्र सिंह, अमरराज श्रीवास, उदित प्रकाश सिंह, अरविंद सिंह और सिविल डिफेंस वॉलंटियर निखिल शिवहरे ने अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार 36 घंटे तक खोजबीन जारी रखी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बृजपुर थाना प्रभारी शक्ति प्रकाश पांडे, चौकी प्रभारी पूर्णानंद मिश्रा और आरक्षक अमर सिंह की उपस्थिति में यह अभियान संपन्न हुआ। अंततः गुरुवार सुबह युवक का शव पानी में तैरता हुआ मिला।
परिवार और छात्र की पृष्ठभूमि कुणाल कुमार ठाकुर बिहार के समस्तीपुर जिले के नामपुर गांव के मूल निवासी थे। उनके पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जो देश की सेवा कर चुके हैं। कुणाल अपने परिवार के सबसे छोटे बेटे थे, जिसके कंधों पर भविष्य की तमाम उम्मीदें टिकी थीं। वे चार भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे थे। सतना जिले में रहकर नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे कुणाल की असमय मृत्यु से उनके परिवार में मातम छा गया है। उनके पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिसने भी सुना वह स्तब्ध रह गया।
पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा का घोर अभाव इस हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बृहस्पति कुंड जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। उनकी मुख्य शिकायतें निम्नलिखित हैं:
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सुरक्षा घेरे की कमी: जलप्रपात के खतरनाक किनारों पर किसी भी प्रकार की फेंसिंग या मजबूत बैरिकेडिंग का अभाव है।
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चेतावनी बोर्ड: पर्यटकों को सावधान करने के लिए पर्याप्त संख्या में चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
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लाइफगार्ड्स की अनुपस्थिति: ऐसे जल स्थलों पर प्रशिक्षित लाइफगार्ड्स का होना अनिवार्य है, जो यहाँ पूरी तरह नदारद हैं।
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समन्वय का अभाव: घटना के समय दोनों जिलों (पन्ना और सतना) की टीमों के बीच समन्वय में कमी दिखी, जिसका खामियाजा युवक की जान के रूप में भुगतना पड़ा।
प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बृहस्पति कुंड को पर्यटकों के लिए सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन जल्द ही यहां स्थायी सुरक्षा इंतजाम, प्रशिक्षित बचाव दल और उचित बेरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं करता है, तो भविष्य में और भी दुखद घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल, बरौंधा पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।
यह हादसा उन सभी पर्यटकों के लिए एक चेतावनी है जो प्राकृतिक स्थलों पर घूमते समय सावधानी को नजरअंदाज कर देते हैं। साथ ही, यह सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए एक आईना है कि वे पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। एक प्रतिभाशाली युवा का जाना पूरे नर्सिंग समुदाय और उनके परिवार के लिए कभी न भर पाने वाली कमी है।
Image Source: https://www.bhaskar.com
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