पन्ना जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ककरन गांव से एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। जमीन के मालिकाना हक को लेकर उपजे विवाद और स्थानीय दबंगों द्वारा की जा रही प्रताड़ना से तंग आकर एक पीड़ित किसान मंगलवार, 14 जुलाई को पन्ना एसपी कार्यालय पहुंचा। किसान ने अपनी व्यथा सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई है और चेतावनी दी है कि यदि उसे प्रशासन से न्याय नहीं मिलता है, तो वह आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाएगा। इस घटना ने पन्ना जिले के राजस्व विभाग और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विवाद की जड़: पुश्तैनी जमीन पर कब्जा करने की साजिश

पीड़ित किसान नत्थू प्रजापति ने एसपी को सौंपे गए अपने लिखित आवेदन में विस्तार से बताया है कि ककरन गांव में उसकी पुश्तैनी जमीन है, जिसका आराजी नंबर 2438/4 है और कुल रकबा 1.230 हेक्टेयर है। नत्थू का आरोप है कि गांव के ही दबंग लोग उसकी इस जमीन को हथियाने के लिए बीते काफी समय से षड्यंत्र रच रहे हैं। पीड़ित के अनुसार, उनकी जमीन के एक बड़े हिस्से (0.82 हेक्टेयर) का विधिवत सरकारी सीमांकन 10 जून 2023 को राजस्व विभाग द्वारा किया गया था। यह सीमांकन पत्थर गाड़कर सुनिश्चित किया गया था कि जमीन किसकी है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।

पटवारी पर रिश्वतखोरी और साठगांठ का संगीन आरोप

नत्थू प्रजापति ने प्रशासनिक मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्षी पक्ष के रामपाल और अनंतराम लोधी ने स्थानीय पटवारी को मोटी रिश्वत दी है। इसी रिश्वत के बदले पटवारी ने कथित तौर पर उन सरकारी सीमांकन के पत्थरों को ही उखड़वा दिया, जो प्रशासन ने स्वयं लगवाए थे। पीड़ित का आरोप है कि सीमांकन के पत्थर उखड़ जाने के बाद से विपक्षी अब बेखौफ होकर जमीन को अपना बताने लगे हैं। यही नहीं, जब नत्थू प्रजापति अपने ही खेत में खेती करने जाते हैं, तो उन्हें विपक्षी पक्ष द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं, जिससे वह अपने ही खेत में जाने से डरने लगे हैं।

न्यायालय के आदेशों की खुलेआम अवहेलना

पीड़ित ने जमीन के दूसरे हिस्से "नांदन" (रकबा 0.40 हेक्टेयर) के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस हिस्से पर उनका पिछले 46 वर्षों से शांतिपूर्ण और निर्बाध कब्जा है। इस जमीन को हड़पने की फिराक में मुरारी लाल सोनी नामक व्यक्ति लगा हुआ है। नत्थू के अनुसार, इस मामले में राजस्व न्यायालय से फैसला पहले ही उनके पक्ष में आ चुका है, इसके बावजूद दबंगों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि वे कोर्ट के आदेश को भी नहीं मान रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि रात के अंधेरे में विपक्षी लोग गुंडे भेजकर न केवल डराते-धमकाते हैं, बल्कि जबरन जमीन पर कब्जे का प्रयास भी करते हैं।

तहसील कार्यालय के चक्कर काटकर हुआ हताश

किसान नत्थू प्रजापति ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें कोरी आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि पटवारी और तहसीलदार की कथित मिलीभगत के कारण उनकी फाइलों को दबा दिया जाता है और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अपनी समस्याओं का समाधान न होता देख और निरंतर हो रहे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने अंततः पन्ना एसपी से उम्मीद जताई है।

एसपी से सुरक्षा और न्याय की गुहार

अपने आवेदन में पीड़ित किसान ने अपनी और अपने पूरे परिवार की सुरक्षा के लिए गुहार लगाई है। उसने स्पष्ट किया है कि दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह कभी भी किसी बड़ी अनहोनी को अंजाम दे सकते हैं। एसपी को दी गई चेतावनी में नत्थू ने कहा है कि "यदि मुझे न्याय नहीं मिला और मेरी पुश्तैनी जमीन मुझे वापस नहीं दिलाई गई, तो मेरे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।" किसान की इस हताशा भरी गुहार ने पन्ना प्रशासन को सकते में डाल दिया है। फिलहाल पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पन्ना पुलिस इस पीड़ित किसान को दबंगों के चंगुल से मुक्त करा पाती है या नहीं।

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