पन्ना, मध्य प्रदेश:
केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के लिए पन्ना टाइगर रिज़र्व समेत 17,000 से अधिक पेड़ काटे जा रहे हैं। लेकिन क्या कोई सोचता है कि ये पेड़ कितनी ऑक्सीजन रोज़ाना पैदा करते हैं?
ICAR-Central Agroforestry Research Institute के अनुसार, एक पेड़ प्रतिदिन औसतन 1,000 से 1,500 लीटर ऑक्सीजन देता है।
मतलब:
17,000 पेड़ मिलकर रोजाना 1.7 करोड़ से 2.55 करोड़ लीटर ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
और अगर 1 लीटर ऑक्सीजन की कीमत ₹607 मानी जाए, तो इसका आर्थिक नुकसान होता है—
रोजाना लगभग ₹103 करोड़ से ₹155 करोड़ तक।
यह बड़ा सवाल जनता पूछना चाहती है:
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क्या इस नुकसान की भरपाई पन्ना की जनता को मिलेगी?
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क्या यह परियोजना हीरे की कीमत से भी ज़्यादा कीमती ऑक्सीजन और पर्यावरण को नुक़सान पहुंचा रही है?
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क्या सरकार इस नुकसान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों—ब्रिजेंद्र प्रताप सिंह और वी. डी. शर्मा से जवाब मांगती है?
सरकार को बताना होगा कि पेड़ों को काटने की बजाय शिफ्ट क्यों नहीं किया जा सकता?
क्या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, और सिया इस गंभीर मुद्दे पर चुप रहेंगे?
अगर पेड़ कटेंगे तो न सिर्फ़ हवा कम होगी, बल्कि मिट्टी का कटाव होगा, और पन्ना जैसे क्षेत्र के रेगिस्तान बनने की संभावना बढ़ जाएगी।
अब जनता जागरूक हो रही है और सवाल कर रही है: "हवा ही खत्म होगी तो हमें क्या मिलेगा? ये नुकसान कौन भरेगा?"
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