मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना अंतर्गत ग्राम शान गुरैया से एक अत्यंत हृदय विदारक और दुखद घटना सामने आई है। यहाँ अंधविश्वास और जागरूकता के अभाव ने एक 7 साल की मासूम बच्ची की जान ले ली। शनिवार की रात जब बच्ची अपने घर में गहरी नींद में सो रही थी, तभी एक जहरीले सांप ने उसे डस लिया। इस अनहोनी के बाद परिजनों ने जो निर्णय लिए, उसने न केवल इलाज में कीमती समय बर्बाद किया, बल्कि बच्ची को मौत के मुंह में धकेल दिया। यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास पर एक कड़ा तमाचा है और चिकित्सा विज्ञान के प्रति लोगों की उदासीनता को उजागर करती है।

क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम शान गुरैया निवासी 7 वर्षीय सनाया डुमार अपने परिवार के साथ घर पर सो रही थी। देर रात अचानक बच्ची दर्द से कराहने और रोने-चिल्लाने लगी। बच्ची की चीख सुनकर परिजन जाग गए और उन्होंने देखा कि उसे किसी जहरीले जीव ने काट लिया है। हालांकि, घटना के तुरंत बाद उसे अस्पताल ले जाने के बजाय परिवार ने पारंपरिक झाड़-फूंक और अंधविश्वास का सहारा लिया। यह निर्णय ही बच्ची के लिए काल साबित हुआ।

पहले झाड़-फूंक, फिर अस्पताल की दौड़ परिजनों ने तत्काल प्रभाव से बच्ची को बरकोला स्थित एक धार्मिक स्थल पर ले जाकर झाड़-फूंक करानी शुरू कर दी। काफी समय तक अंधविश्वास के इन चक्करों में उलझे रहने के बाद जब बच्ची की स्थिति बिगड़ने लगी, तो वहां मौजूद पुजारी ने स्वयं स्थिति की गंभीरता को भांप लिया और परिजनों को तत्काल अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन हड़बड़ाहट में उसे अजयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बच्ची की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय पन्ना रेफर कर दिया।

इलाज के दौरान तोड़ा दम पन्ना के जिला अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने पूरी तत्परता के साथ बच्ची का इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सांप का जहर बच्ची के पूरे शरीर में फैल चुका था, जिससे उसके शरीर के अंग काम करना बंद कर रहे थे। काफी मशक्कत के बावजूद डॉक्टर बच्ची की जान नहीं बचा सके और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस घटना से बच्ची के परिवार में कोहराम मच गया है। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची अजयगढ़ पुलिस ने मामले में पंचनामा कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम किया है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

अंधविश्वास और स्वास्थ्य विभाग की चिंता

समय की बर्बादी ही बनी मौत का कारण बच्ची के परिजन नत्थू ने स्वीकार किया कि झाड़-फूंक और धार्मिक स्थलों के चक्कर में अस्पताल पहुंचने में बहुत समय खराब हुआ। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन लगातार ग्रामीण अंचलों में यह जागरूकता फैलाते रहे हैं कि किसी भी जहरीले जीव के काटने पर व्यक्ति को अंधविश्वास में फंसने के बजाय सीधे सरकारी अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाना चाहिए। लेकिन, जागरूकता के इन दावों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग ओझा-गुनियों और झाड़-फूंक के जाल में फंसकर अपनी और अपनों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

सांप काटने पर अपनाएं सही तरीका चिकित्सकों के अनुसार, सांप काटने के बाद 'गोल्डन ऑवर' बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को सही समय पर 'एंटी-स्नेक वेनम' (Anti-Snake Venom) इंजेक्शन मिल जाए, तो जान बचने की संभावना 99 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग इसे काला जादू या किसी बाधा के रूप में देखते हैं और झाड़-फूंक करने वालों के पास चले जाते हैं, जो पूरी तरह से अवैज्ञानिक और जानलेवा है।

समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

क्या हमें फिर से सोचना होगा? पन्ना जिले की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक अंधविश्वास की भेंट मासूम बच्चे चढ़ते रहेंगे? प्रशासन को अब जमीनी स्तर पर और अधिक आक्रामक तरीके से जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार से नहीं, बल्कि गांव-गांव में जाकर लोगों को यह समझाने की जरूरत है कि सांप का इलाज केवल और केवल चिकित्सालय में ही संभव है।

सावधानी के उपाय

  1. साफ-सफाई: घर और उसके आसपास के क्षेत्रों में झाड़ियों को साफ रखें, ताकि सांपों को छिपने की जगह न मिले।

  2. प्रकाश: रात के समय सोते समय अपने बिस्तर के आसपास अच्छी रोशनी रखें।

  3. तुरंत कार्रवाई: यदि किसी को सांप ने काटा है, तो मरीज को घबराहट से बचाएं, उसे चलने न दें और तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।

  4. अंधविश्वास का विरोध: समाज के जागरूक लोगों को आगे आकर झाड़-फूंक का विरोध करना चाहिए और पीड़ितों को समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए।

निष्कर्ष 7 साल की बच्ची सनाया की मृत्यु केवल एक आंकड़े में नहीं गिनी जानी चाहिए, बल्कि इसे एक सामूहिक विफलता के रूप में देखा जाना चाहिए। समाज के एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमारा कर्तव्य है कि हम अपने आसपास के लोगों को इस तरह के खतरों के प्रति सचेत करें। यदि हम समय रहते अंधविश्वास के इस चक्र को नहीं तोड़ेंगे, तो पन्ना जैसे कई जिलों में मासूमों की जान इसी तरह जाती रहेगी। प्रशासन से भी यह अपेक्षा है कि वह स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करे और ग्रामीण अंचलों में सांप काटने के बाद अपनाई जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा के बारे में शिविर आयोजित करे।

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