पन्ना जिले के वन विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाली इटवांकला वन चौकी में तैनात एक वन आरक्षक के साथ ड्यूटी के दौरान बेहद ही शर्मनाक और हिंसक घटना घटित हुई। कार्य के भुगतान को लेकर उत्पन्न विवाद में तीन सगे भाइयों ने न केवल वन रक्षक के साथ मारपीट की, बल्कि उनकी वर्दी फाड़कर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। यह घटना न केवल सरकारी कर्मचारी की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी बयां करती है।
घटना का विवरण: बीट से लौटते समय घात लगाकर किया हमला
यह घटना 14 जुलाई 2026 की शाम लगभग 5:30 बजे की है। वन आरक्षक रोहित गुप्ता अपनी नियमित ड्यूटी के तहत बीट का दौरा कर मोटरसाइकिल से वापस लौट रहे थे। जब वे इटवांकला गांव में बीरेन्द्र चौरहा के घर के पास से गुजर रहे थे, तो वहां पहले से ही घात लगाए बैठे रामजी चौरहा ने उन्हें हाथ देकर रोका। इस दौरान वन आरक्षक को इस बात का तनिक भी आभास नहीं था कि आगे एक बड़ी साजिश रची जा चुकी है।
भुगतान का विवाद: काम की फाइल और हकीकत
विवाद की जड़ एक छोटे तालाब (तलैया) की खुदाई का भुगतान था। रामजी चौरहा ने रुकते ही वन आरक्षक से खुदाई के काम के पैसों की मांग की। इस पर आरक्षक रोहित गुप्ता ने अत्यंत धैर्य और शालीनता के साथ स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने रामजी को समझाया कि विभाग में भुगतान सीधे उनके हाथ में नहीं होता, बल्कि इसके लिए पूरी कागजी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। आरक्षक ने जानकारी दी कि उन्होंने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करके फाइल पन्ना स्थित विभाग के मुख्य कार्यालय में भेज दी है, इसलिए उन्हें वहां जाकर संपर्क करना चाहिए।
संभवतः भुगतान में हो रही देरी से पहले से ही उग्र रामजी चौरहा, वन आरक्षक के इस जवाब को सुनकर आपा खो बैठे और उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगे।
मारपीट और वर्दी का अपमान
जब वन आरक्षक ने उन्हें अपनी ड्यूटी पर होने और शालीनता से बात करने की नसीहत दी, तो स्थिति और भी बिगड़ गई। रामजी चौरहा के इशारे पर उसके दो अन्य सगे भाई, धीरेन्द्र चौरहा और श्यामजी चौरहा भी वहां पहुंच गए। इन तीनों ने मिलकर वन आरक्षक पर हमला कर दिया।
इस घटना में सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब श्यामजी चौरहा ने वन आरक्षक की वर्दी का कॉलर पकड़कर जोर से खींच दिया, जिससे वर्दी के बटन टूट गए और कपड़ा पूरी तरह फट गया। वर्दी का अपमान सरकारी तंत्र के साथ किए गए अभद्र व्यवहार की पराकाष्ठा है। वहीं दूसरी ओर, रामजी और धीरेन्द्र ने लाठियों से आरक्षक पर अंधाधुंध वार किए, जिससे उनकी पीठ, कंधे और कोहनी पर गंभीर चोटें आईं। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय ग्रामीण बल्लू आदिवासी और मंगल सिंह यादव की सक्रियता के कारण आरक्षक की जान बच पाई, जिन्होंने बीच-बचाव कर हमलावरों को दूर किया।
जान से मारने की धमकी और कानूनी कार्रवाई
हमला करने के बाद तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए, लेकिन जाते-जाते उन्होंने आरक्षक को यह चेतावनी दी कि यदि काम का पैसा जल्द नहीं मिला, तो अगली बार वे उनकी जान ले लेंगे। इस जानलेवा हमले से व्यथित वन आरक्षक किसी तरह अपनी चौकी तक पहुंचे। उन्होंने पूरी घटना की जानकारी रेंजर लीलाधर शाह और परिक्षेत्र अधिकारी अंकित भदौरिया को दी।
वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद, इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया। पन्ना कोतवाली थाने में पीड़ित आरक्षक की शिकायत पर तीनों भाइयों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज करने और जानलेवा हमला करने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। वर्तमान में पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का दावा किया जा रहा है।
निष्कर्ष
पन्ना की इस घटना ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्न खड़ा किया है। वन जैसे दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए इस तरह की घटनाएं मनोबल तोड़ने वाली होती हैं। यह आवश्यक है कि अपराधियों के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई की जाए कि भविष्य में किसी भी सरकारी सेवक को इस प्रकार की हिंसा का शिकार न होना पड़े। कानून को अपने हाथ में लेने वालों के लिए यह एक कड़ी चेतावनी है कि पन्ना पुलिस और न्यायपालिका इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरतेगी। फिलहाल पूरा क्षेत्र इस घटना को लेकर स्तब्ध है और अपराधियों के पकड़े जाने की प्रतीक्षा कर रहा है।
image source: https://www.bhaskar.com
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