मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहाँ जीवन रक्षक 108 एम्बुलेंस के बीच रास्ते में खराब हो जाने से एक गंभीर मरीज की जान सांसत में पड़ गई। अजयगढ़ से जिला अस्पताल रेफर किए गए एक मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस का टायर अचानक जंगल के बीचों-बीच फट गया, जिसके कारण मरीज को लगभग डेढ़ घंटे तक उसी एम्बुलेंस में फंसा रहना पड़ा। यह घटना जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एम्बुलेंसों के रखरखाव और उनकी फिटनेस पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

घटना का विवरण: जंगल में फंसी जान

यह घटना पन्ना जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर खजुरी मोड़ के पास घटित हुई। दोपहर के समय जब एम्बुलेंस अजयगढ़ से मरीज को लेकर जिला अस्पताल की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक टायर फटने से वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे रुक गया। एम्बुलेंस में मौजूद मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में था और उसे ऑक्सीजन सपोर्ट की सख्त आवश्यकता थी। ऐसे समय में जब मरीज को हर मिनट कीमती होता है, एम्बुलेंस का इस प्रकार बीच रास्ते में खराब होना मरीज और उसके परिजनों के लिए एक बड़ी आपदा बन गया।

मरीज के साथ मौजूद आशा कार्यकर्ता बिमला अहिरवार ने बताया कि मरीज कई दिनों से तेज बुखार से जूझ रहा था। अजयगढ़ अस्पताल से पन्ना जिला अस्पताल के लिए रेफर किए जाने के बाद उसे बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रास्ते में हुई इस तकनीकी खराबी ने उपचार के समय में लंबा अंतराल पैदा कर दिया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर एम्बुलेंस खराब हुई, वह एक सन्नाटे वाला जंगल क्षेत्र था, जहाँ मदद का कोई साधन नहीं था।

सुविधाओं का अभाव और परिजनों का डर

सबसे अधिक हैरान करने वाली बात यह रही कि खराब हुई एम्बुलेंस में न तो एयर कंडीशनर की सुविधा थी और न ही उसमें टायर बदलने के लिए कोई अतिरिक्त (स्टेपनी) टायर उपलब्ध था। एयर कंडीशनर न चलने के कारण दोपहर की चिलचिलाती गर्मी में ऑक्सीजन पर लेटे हुए मरीज की हालत और बिगड़ने लगी, जिसे देखकर उसके परिजन बेहद घबरा गए। जंगल के बीचों-बीच फंसी एम्बुलेंस में मरीज का दम घुटता हुआ महसूस हो रहा था और परिजन बेबस होकर पन्ना से मदद आने का इंतजार करते रहे। डेढ़ घंटे का यह समय मरीज के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।

जर्जर टायर और रखरखाव पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद एम्बुलेंस के चालक (पायलट) सोभा प्रसाद कोंदर ने एम्बुलेंस के रखरखाव की पोल खोल दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि वाहनों के जर्जर और पुराने टायरों को बदलने के लिए उन्होंने प्रबंधन के समक्ष कई बार मांग रखी थी, लेकिन उस पर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। चालक का कहना है कि पन्ना जिले में चल रही कई एम्बुलेंस इसी तरह के पुराने और घिसे हुए टायरों के सहारे जोखिम उठाकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह न केवल चालक और मरीजों के लिए बल्कि अन्य वाहन चालकों के लिए भी खतरे का संकेत है। यदि टायर फटने की यह घटना तेज रफ्तार में होती, तो कोई भी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

प्रशासन की सक्रियता और दूसरी एम्बुलेंस का इंतज़ाम

डेढ़ घंटे के इंतज़ार और दहशत के बाद, पन्ना मुख्यालय से सूचना मिलने पर एक दूसरी एम्बुलेंस घटनास्थल पर भेजी गई। दूसरी एम्बुलेंस के आने के बाद ही मरीज को सुरक्षित रूप से जिला अस्पताल तक स्थानांतरित किया जा सका, जहाँ उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। पन्ना के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

सीएमएचओ ने जानकारी दी कि जिले में 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस को मिलाकर कुल 28 वाहन स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। इस घटना के बाद, उन्होंने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें इन दोनों सेवाओं के प्रबंधन और पायलटों को तलब किया गया है। बैठक में वाहनों की वर्तमान स्थिति, टायर और अन्य तकनीकी सुधारों पर चर्चा की जाएगी। सीएमएचओ ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

निष्कर्ष

पन्ना की यह घटना सरकारी एम्बुलेंस सेवाओं में व्याप्त लापरवाही की एक बानगी है। जीवन रक्षक मानी जाने वाली 108 सेवा यदि समय पर काम न आए और उसमें बेसिक सुविधाएं जैसे स्पेयर टायर और एयर कंडीशनर भी न हों, तो यह सीधे तौर पर मरीज के जीवन के साथ खिलवाड़ है। एक गंभीर मरीज जिसे पन्ना अस्पताल पहुँचकर राहत मिलनी चाहिए थी, उसे जर्जर एम्बुलेंस की वजह से डेढ़ घंटे की अतिरिक्त पीड़ा झेलनी पड़ी।

यह घटना प्रशासन को इस बात के लिए विवश करती है कि वह सिर्फ वाहनों की संख्या न बढ़ाए, बल्कि उनकी फिटनेस और रखरखाव पर भी कड़ा नियंत्रण रखे। पन्ना जिले की जनता अब उम्मीद कर रही है कि सीएमएचओ द्वारा बुलाई गई बैठक सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर, जमीनी स्तर पर एम्बुलेंस सेवाओं में सुधार लाएगी ताकि फिर किसी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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