मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली ए.एन.एम. (ANM) कार्यकर्ताओं ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त ए.एन.एम. एसोसिएशन के बैनर तले जिले भर से एकत्रित हुई सैकड़ों महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने पन्ना कलेक्ट्रेट परिसर तक एक विशाल रैली निकाली और शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याओं को पुरजोर तरीके से रखा। रैली के पश्चात संघ ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। इस प्रदर्शन के माध्यम से एएनएम कार्यकर्ताओं ने अपनी आर्थिक, मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों को उजागर करते हुए सरकार से तत्काल समाधान की अपील की है।
एएनएम का इतिहास और कार्यभार का बढ़ता बोझ
ज्ञापन में संघ ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि एएनएम कैडर वर्ष 1950 से निरंतर स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी सेवाएं दे रहा है। विशेष रूप से दुर्गम पहाड़ी और जनजातीय बहुल क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने में इन कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हालांकि, संघ का आरोप है कि वर्तमान में उन्हें निर्धारित गाइडलाइनों से कहीं अधिक कार्यभार सौंपा गया है। एक एएनएम पर उनकी क्षमता से 2 से 3 गुना अधिक जनसंख्या का स्वास्थ्य भार डाला जा रहा है, जिसके कारण उन्हें न केवल शारीरिक श्रम बल्कि आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ रहा है। संघ का कहना है कि वे जनसेवा के लिए सदैव तत्पर हैं, लेकिन उनके श्रम का उचित मूल्य और मान सम्मान मिलना भी उनका अधिकार है।
प्रमुख मांगें: नियमितीकरण और समान लाभ की आवश्यकता
संघ की मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा वर्षों से संविदा पर कार्यरत एएनएम कर्मियों का तत्काल नियमितीकरण है। एसोसिएशन का तर्क है कि लंबे समय तक संविदा पर रहने के बाद अब उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही, उन्होंने नियमित कर्मचारियों के समान लाभों की मांग की है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
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एनपीएस (NPS) और ग्रेच्युटी: सेवानिवृत्ति के पश्चात सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।
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स्वास्थ्य बीमा और डी.ए. (DA): महंगाई के इस दौर में जीवन यापन को सरल बनाने हेतु।
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गृह भाड़ा भत्ता (HRA): कार्यस्थल की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर।
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अनुकंपा नियुक्ति: किसी अप्रिय घटना की स्थिति में परिवार की सुरक्षा के लिए।
वेतन विसंगतियां और पदनाम में बदलाव
एएनएम संघ ने वेतन विसंगतियों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग एएनएम का ग्रेड पे बढ़ाकर 3200 से 3400 रुपये करने की है। इसके अतिरिक्त, संघ ने मांग की है कि उन्हें नर्सिंग कैडर का हिस्सा माना जाए और उनका पदनाम बदलकर 'आर.एच.ओ.' (RHO) किया जाए। यह बदलाव न केवल उनके कार्य की गंभीरता को दर्शाता है बल्कि उन्हें करियर में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगा।
पोर्टल की बाध्यताएं और तकनीकी चुनौतियां
प्रदर्शन के दौरान एएनएम कार्यकर्ताओं ने 'सार्थक ऐप' और 'अनमोल पोर्टल' के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। संघ का आरोप है कि 'सार्थक ऐप' की कठिन बाध्यताओं के कारण आए दिन उनका वेतन काटा जा रहा है, जो कि अत्यंत अनुचित है। इसी प्रकार, 'अनमोल पोर्टल' में मौजूद तकनीकी खामियों के कारण डेटा प्रविष्टि में दिक्कतें आ रही हैं। संघ ने मांग की है कि इस पोर्टल में सुधार के लिए 'एडिट' का विकल्प अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए, ताकि अनजाने में हुई गलतियों को समय रहते सुधारा जा सके और कार्यकर्ताओं को अनावश्यक आर्थिक दंड से बचाया जा सके।
आर्थिक प्रोत्साहन और लंबित भुगतानों का मुद्दा
अपनी मांगों के विस्तृत विवरण में संघ ने निम्नलिखित वित्तीय विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है:
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कार्य प्रोत्साहन राशि: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत सभी एएनएम को 15,000 रुपये की कार्य प्रोत्साहन राशि दी जाए।
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वेतन का भुगतान: मार्च से जून माह तक 'सार्थक अटेंडेंस' के नाम पर रोके गए वेतन और मानदेय का तत्काल प्रभाव से भुगतान किया जाए।
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ईपीएफ (EPF) और टीडीएस (TDS): संविदा एएनएम का वर्ष 2025/2026 का टीडीएस और ईपीएफ बिल बिना किसी देरी के उनके संबंधित बैंक खातों में जमा कराया जाए।
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वेतन वापसी: वर्ष 2023 की हड़ताल अवधि और वर्ष 2024 में आयुष्मान कार्ड बनाने के लक्ष्य के नाम पर काटी गई 7 दिनों की सैलरी को तत्काल वापस किया जाए।
कार्यक्षेत्र की चुनौतियां और यात्रा सुविधा
पन्ना जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में, जहाँ कई क्षेत्र दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरे हैं, एएनएम कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। संघ ने मांग की है कि ऐसे दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत एएनएम को यात्रा और वाहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे समय पर मरीजों तक पहुँच सकें और स्वयं की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकें।
निष्कर्ष और सरकार का रुख
पन्ना जिले के एएनएम संघ का यह प्रदर्शन स्वास्थ्य विभाग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब कर्मचारी अपनी उपेक्षा अधिक समय तक सहन नहीं करेंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इस ज्ञापन पर क्या कार्रवाई की जाती है और क्या पन्ना की ये स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने हक की लड़ाई में सफल हो पाती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू व्यवस्था के लिए इन कार्यकर्ताओं का संतुष्ट होना अनिवार्य है।
image source : https://www.bhaskar.com
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