नवरात्रि में किलकिला किनारे बड़ी देवी मंदिर पर जवारे लेकर पहुंचने वालों की कतार लगती है। अबै असली भीड़ आगे है।

अमर उजाला के कैलेंडर के मुताबिक नवरात्रि 11 अक्टूबर को शुरू हुई। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी साथ हैं, इसलिए कन्या पूजन और हवन का समय स्थानीय पंचांग से पक्का करें।

एक नज़र में: पन्ना का त्योहार कैलेंडर
तारीख पर्व पन्ना में कहां
16 अक्टूबर नवरात्रि का छठा दिन देवी मंदिर, पंडाल
19 अक्टूबर महाअष्टमी और महानवमी बड़ी देवी मंदिर, जवारे
20 अक्टूबर दशहरा (विजयादशमी) खेजड़ा मंदिर, तलवार रस्म
20 से 21 अक्टूबर दशमी तिथि 20 दोपहर 12:50 से 21 दोपहर 2:11
25 अक्टूबर शरद पूर्णिमा प्राणनाथ मंदिर, महारास
25 से 26 अक्टूबर पूर्णिमा तिथि 25 सुबह 11:55 से 26 सुबह 9:41

1. बड़ी देवी पद्मावती: जहां से शहर को नाम मिला

ETV भारत के मुताबिक किलकिला किनारे का मां पद्मावती मंदिर, यानी बड़ी देवी, शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि शहर का नाम पद्मावतीपुरी इसी मंदिर से पड़ा। नवदुर्गा अष्टमी पर यहां जवारे के साथ बड़ा मेला लगता है।

पुजारी परिवार के मुताबिक पन्ना में शादी का पहला न्योता आज भी देवी को चढ़ाया जाता है।

2. बनौली की कंकाली माता: लेटी हुई प्रतिमा

पन्ना से करीब 90 किलोमीटर दूर बनौली गांव के कंकाली माता मंदिर में, ETV भारत के मुताबिक, देवी की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में है। दोनों नवरात्रि में यहां मेला भरता है।

3. दशहरा, 20 अक्टूबर: खेजड़ा मंदिर की तलवार और बीड़ा

पन्ना का दशहरा बाकी जगहों से अलग है। ETV भारत की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक दशहरे के दिन खेजड़ा मंदिर में महाराजा छत्रसाल के वंशज को तलवार, पान का बीड़ा और रुमाल भेंट करने की करीब 400 साल पुरानी परंपरा निभाई जाती है। अब यह रस्म महाराजा छत्रसाल द्वितीय निभाते हैं।

परंपरा के मुताबिक महामति प्राणनाथ ने यहीं खेजड़े के पेड़ के नीचे छत्रसाल को आशीर्वाद दिया था। इस मौके पर नेपाल समेत विदेशों से भी प्रणामी श्रद्धालु आते हैं।

4. शरद पूर्णिमा, 25 अक्टूबर: प्राणनाथ मंदिर का महारास

पन्ना जिला प्रशासन की वेबसाइट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव विजयादशमी से शुरू होता है और पूर्णिमा की रात इसका मुख्य आयोजन होता है। आधी रात को बंगला जी मंदिर से श्रीजी की सवारी निकलती है और रात भर महारास चलता है।

2024 के कार्यक्रम में ETV भारत ने बताया था कि रास मंदिर साल में एक ही बार खुलता है। इस साल का पूरा कार्यक्रम ट्रस्ट की घोषणा के बाद साफ होगा।

त्योहार से पहले कर लें ये 5 काम

  1. अष्टमी-नवमी के पूजन का समय स्थानीय पंचांग से पक्का करें।
  2. बड़ी देवी मंदिर सुबह जल्दी जाएं, बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें।
  3. दशहरे पर खेजड़ा मंदिर की रस्म का समय मंदिर से पूछ लें।
  4. शरद पूर्णिमा के कार्यक्रम की तारीखें ट्रस्ट से जान लें।
  5. बाहर से आने वाले मेहमानों के ठहरने का इंतजाम पहले कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: इस बार अष्टमी और नवमी कब हैं?

उत्तर: दोनों 19 अक्टूबर 2026 को हैं।

प्रश्न: दशहरा किस दिन है?

उत्तर: 20 अक्टूबर, मंगलवार। दशमी तिथि 20 को दोपहर 12:50 से शुरू होगी।

प्रश्न: शरद पूर्णिमा कब है?

उत्तर: 25 अक्टूबर, रविवार। पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर सुबह 9:41 तक रहेगी।

प्रश्न: खेजड़ा मंदिर में दशहरे पर क्या होता है?

उत्तर: छत्रसाल के वंशज को तलवार, पान का बीड़ा और रुमाल भेंट करने की परंपरा।

यह खबर 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। पूजन के मुहूर्त स्थानीय पंचांग से और शरद पूर्णिमा महोत्सव का कार्यक्रम श्री प्राणनाथ मंदिर ट्रस्ट या जिला प्रशासन से जरूर पक्का कर लें।