पन्ना टाइगर रिजर्व के भीतर, पन्ना-छतरपुर सीमा पर केन नदी पर दौधन बांध का काम चल रहा है। उसी के डूब क्षेत्र पर अब जबलपुर में सवाल उठा है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायाधीश विवेक जैन की खंडपीठ याचिका सुन रही है।
अमर उजाला की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को जवाब के लिए दो सप्ताह दिए हैं। पन्ना के लिए मामला सीधा है: डूब वाले गाँव, जंगल और बाघ, तीनों इसी जिले में हैं।
1. हाईकोर्ट ने क्या माँगा
याचिका जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने दायर की है। कोर्ट ने केंद्र से CEC की रिपोर्ट, उसमें दर्ज आपत्तियाँ और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले की स्थिति माँगी है। राज्य से पूछा है कि उस रिपोर्ट पर अब तक क्या कदम उठाए।
पीपुल्स अपडेट के मुताबिक CEC ने परियोजना की वन्यजीव मंजूरी जाँचकर 30 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी।
2. याचिका में क्या दावे हैं
याचिका में वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट के हवाले से करीब 60 लाख पेड़ कटने और पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से ज्यादा हिस्सा डूब में आने का दावा है। केन घड़ियाल अभयारण्य पर असर और 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट में गलतियों का मुद्दा भी है। ये याचिका के दावे हैं, कोर्ट ने इन पर फैसला नहीं दिया है।
3. सरकार का पक्ष क्या है
परियोजना प्राधिकरण के मुताबिक उद्देश्य बुंदेलखंड में पानी और सिंचाई की कमी दूर करना है, साथ में प्रतिपूरक वनीकरण और ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप प्रबंधन योजना लागू हो रही है। जुलाई 2026 में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने विधानसभा में बताया कि पन्ना के 7 गाँवों के सभी 1,321 विस्थापित परिवारों को पुनर्वास पैकेज और 8 गाँवों के 644 खातेदारों को मुआवजा मिल चुका है।
10 जुलाई को कैबिनेट ने पन्ना के मझगाय और रुंझ बांध के विस्थापितों के लिए 202.50 करोड़ रुपये अतिरिक्त मंजूर किए थे। प्रति विस्थापित राशि 5 लाख से बढ़कर 12.50 लाख रुपये हुई।
4. पन्ना के गाँवों में ज़मीनी हालात
पन्ना के 8 प्रभावित गाँव गिनाए गए, जिनमें कोनी, गहदरा और कूड़न शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक गहदरा के 29 आदिवासी परिवार अहिरगुवां पंचायत में बसे हैं और पानी, बिजली की कमी बता रहे हैं। मझगाय में 17 दिन आंदोलन चला। संभाग आयुक्त दिलीप कुमार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत मुआवजा बँट चुका है।
5. आगे क्या
जवाब आने के बाद अगली सुनवाई होगी। निर्माण पर कोई रोक नहीं लगी है। परियोजना पूरी करने का लक्ष्य 2030 है।
एक नज़र में: 5 बड़ी बातें
- हाईकोर्ट ने केंद्र और MP सरकार से दो सप्ताह में जवाब माँगा।
- केंद्र को 2019 की CEC रिपोर्ट पेश करनी होगी।
- याचिका में टाइगर रिजर्व के बड़े हिस्से के डूबने का दावा।
- सरकार के मुताबिक पन्ना के 1,321 विस्थापित परिवारों को पैकेज मिला।
- निर्माण पर कोई रोक नहीं, अगली सुनवाई जवाब के बाद।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: क्या हाईकोर्ट ने केन-बेतवा का काम रोका है?
उत्तर: नहीं। अभी केवल जवाब और CEC रिपोर्ट माँगी गई है।
प्रश्न: जवाब के लिए कितना समय है?
उत्तर: दो सप्ताह।
प्रश्न: पन्ना में कितने परिवार विस्थापित हुए?
उत्तर: विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक 7 गाँवों के 1,321 परिवार।
प्रश्न: मुआवजे की शिकायत कहाँ करें?
उत्तर: तहसील कार्यालय या कलेक्टर कार्यालय पन्ना में लिखित आवेदन दें और पावती लें।
यह खबर 15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। याचिका के दावे अदालत में विचाराधीन हैं। मुआवजे और सुनवाई की जानकारी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
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