पन्ना: बुंदेलखंड के हृदय स्थल पन्ना की बेशकीमती वन संपदा को सुरक्षित रखने की दिशा में दक्षिण पन्ना वन मंडल ने एक बड़ी और रणनीतिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। पवई क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने अचानक धावा बोलकर न केवल अवैध लकड़ी का जखीरा पकड़ा है, बल्कि उन 'मांग केंद्रों' को भी कड़ा संदेश दिया है जो अनजाने में या जानबूझकर वनों के विनाश का कारण बन रहे हैं। दक्षिण पन्ना वन मंडल के तहत आने वाले पवई रेंज में विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए अब केवल पेड़ों की कटाई करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उस लकड़ी को खरीदने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।\n\nपवई वन परिक्षेत्र अधिकारी नीतेश पटेल के नेतृत्व में वन विभाग की एक विशेष टीम ने क्षेत्र के पांच प्रमुख होटलों, रेस्टोरेंटों और ढाबों पर औचक छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान वन अधिकारियों ने बारीकी से इन प्रतिष्ठानों के रसोई घरों और भंडारण क्षेत्रों की तलाशी ली। टीम की इस अचानक सक्रियता से पूरे क्षेत्र के होटल और ढाबा संचालकों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान दो ढाबा संचालकों के पास से बड़ी मात्रा में ऐसी जलाऊ लकड़ी बरामद हुई, जिसका कोई वैध स्रोत नहीं था। विभाग ने इन दोनों संचालकों पर वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लकड़ी जब्त कर ली है, जबकि तीन अन्य प्रतिष्ठानों को सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।\n\nइस पूरी कार्रवाई के पीछे विभाग की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है, जिसे 'डिमांड साइड कंट्रोल' कहा जा रहा है। डीएफओ (मंडल वन अधिकारी) अनुपम शर्मा ने इस रणनीति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पन्ना के जंगल अपनी जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लेकिन ढाबों और होटलों में ईंधन के रूप में लकड़ी की बढ़ती मांग जंगलों के भविष्य को अंधकार में डाल रही है। उन्होंने एक गंभीर समस्या की ओर इशारा किया—'पुनरुत्पादन' (Regeneration)। शर्मा के अनुसार, ढाबा संचालक अक्सर उन छोटे पौधों और टहनियों की मांग करते हैं जो भविष्य में विशाल वृक्ष बनने वाले होते हैं। तस्कर और स्थानीय लोग थोड़े से मुनाफे के लिए इन नवजात पेड़ों को काट देते हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक विकास पूरी तरह बाधित हो जाता है। जब तक शहर और हाईवे के किनारे बसे ढाबों पर अवैध लकड़ी की खपत बनी रहेगी, तब तक जंगलों में कुल्हाड़ी की आवाज को रोकना असंभव होगा।\n\nछापेमारी के दौरान वन विभाग की टीम ने संचालकों से लकड़ी के वैध बिल और ट्रांजिट पास (टीपी) की मांग की। भारतीय वन कानून के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी का परिवहन या भंडारण बिना वैध दस्तावेजों के दंडनीय अपराध है। पकड़े गए दो ढाबा संचालकों ने लकड़ी के स्रोत के बारे में जो जानकारी दी, वह संदिग्ध पाई गई। मौके पर मौजूद टीम ने तत्काल पंचनामा तैयार किया और जखीरे को अपने कब्जे में ले लिया। परिक्षेत्र सहायक श्रीनिवास पाण्डेय के नेतृत्व में इस टीम में मनीष वर्मा, रामजी गर्ग, पुष्पेंद्र पाल, गायत्री सिंह, सचिन राठौरिया और अशोक बागरी जैसे दक्ष वनकर्मी शामिल थे।\n\nपन्ना के पर्यावरणविदों ने विभाग के इस कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के बफर जोन में वन संपदा पर दबाव बढ़ रहा है। ढाबों पर जलने वाली लकड़ी केवल ईंधन नहीं है, बल्कि वह उन पक्षियों और छोटे जीवों का घर भी है जो पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि मांग पक्ष पर प्रहार किया जाए, तो आपूर्ति अपने आप कम हो जाएगी। विभाग की इस कार्रवाई से न केवल अवैध कटाई पर रोक लगेगी, बल्कि होटल संचालकों को वैकल्पिक ईंधन जैसे एलपीजी या बायोगैस की ओर मुड़ने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा।\n\nपवई वन विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है। आने वाले दिनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की औचक जांच की जाएगी। विभाग ने सभी व्यावसायिक संस्थानों को सख्त हिदायत दी है कि वे केवल पंजीकृत और वैध डिपो से ही लकड़ी की खरीद करें और उसका पूरा रिकॉर्ड रखें। यदि भविष्य में किसी भी ढाबे या रेस्टोरेंट में अवैध लकड़ी का उपयोग पाया जाता है, तो न केवल सामग्री जब्त की जाएगी, बल्कि भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान भी किया जाएगा। पन्ना की हरियाली को बचाने के लिए विभाग की यह 'जीरो टॉलरेंस' नीति अब धरातल पर दिखने लगी है।
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पवई में वन विभाग का 'सर्जिकल स्ट्राइक': ढाबों पर अवैध लकड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, पर्यावरण तस्करों की कमर तोड़ने की तैयारी
पन्ना के जंगलों को बचाने के लिए दक्षिण वन मंडल ने बदली रणनीति, 'डिमांड साइड' पर प्रहार कर दो ढाबा संचालकों पर दर्ज किया केस, भविष्य के पेड़ों को बचाने की अनूठी म

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