मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के कटबरियन मोड़ पर एक भयानक सड़क दुर्घटना घटित हुई, जहाँ लोहे की जालियों और सरियों से ओवरलोड होकर जा रहा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। इस भीषण हादसे के दौरान ट्रक का चालक और उसका हेल्पर केबिन के अंदर भारी-भरकम लोहे की जालियों के नीचे लगभग 30 मिनट तक दबे रहे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और आसपास के जांबाज लोगों ने त्वरित सूझबूझ का परिचय देते हुए क्रेन की सहायता से एक जटिल बचाव अभियान चलाया और दोनों घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। इस दुर्घटना ने एक बार फिर पहाड़ी रास्तों और ढलानों पर भारी वाहनों के अनियंत्रित होने के खतरों को उजागर किया है, साथ ही वाहनों की समय पर तकनीकी जांच और ओवरलोडिंग के गंभीर मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

दुर्घटना का स्थान और समयक्रम

यह पूरी दुर्घटना पन्ना जिले के अंतर्गत आने वाले खतरनाक और घुमावदार कटबरियन मोड़ की ढलान पर हुई। प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एक भारी ट्रक जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर UP 51 AT 2710 है, लोहे की जालियों और निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले सरियों से पूरी तरह ओवरलोड होकर कानपुर की ओर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा था।

जब यह भारी वाहन कटबरियन मोड़ की ढलान पर पहुंचा, तो अचानक से वाहन के ब्रेक पूरी तरह से फेल हो गए। ब्रेक फेल होने के कारण चालक का वाहन से नियंत्रण पूरी तरह से छूट गया और ढलान होने के कारण ट्रक बेकाबू होकर तेजी से आगे बढ़ा और सड़क किनारे जा पलटा। ट्रक के पलटते ही उसमें लदा भारी-भरकम लोहे का सामान बिखर गया और केबिन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे वाहन के भीतर मौजूद लोग अंदर ही फंस गए।

घायलों की पहचान और वाहन विवरण

इस दुर्घटना का शिकार होने वाला ट्रक उत्तर प्रदेश के कानपुर के हैदरगंज क्षेत्र से संबंधित बताया जा रहा है। इस भारी वाहन को हैदरगंज के ही निवासी अंकित यादव (आयु 30 वर्ष) चला रहे थे। उनके साथ वाहन में उनका हेल्पर राहुल यादव (आयु 25 वर्ष) भी मौजूद था, जो यात्रा के दौरान चालक की सहायता कर रहा था।

ढलान पर अचानक ब्रेक फेल होने के बाद जब ट्रक पलटा, तो ये दोनों युवा वाहन के अगले हिस्से यानी केबिन और उस पर लदी भारी लोहे की जालियों के नीचे बुरी तरह से फंस गए। वाहन में क्षमता से अधिक सामान भरा होने के कारण केबिन का वजन और दबाव इतना अधिक बढ़ गया था कि दोनों के लिए अपने दम पर बाहर निकलना पूरी तरह से असंभव हो गया था।

30 मिनट तक चला साहसिक बचाव अभियान

दुर्घटना के वक्त जोरदार धमाका हुआ, जिसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण, स्थानीय नागरिक और सड़क से गुजरने वाले राहगीर तुरंत अपनी जान की परवाह किए बिना मदद के लिए मौके की तरफ दौड़े। कुछ ही पलों में घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

जैसे ही लोगों ने देखा कि चालक और हेल्पर लोहे की जालियों के नीचे दबे हुए हैं, उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम भी बिना किसी देरी के मौके पर पहुंच गई। चूंकि मामला लोहे की भारी जालियों और सरियों का था, इसलिए हाथों से मलबा हटाना मुमकिन नहीं था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक क्रेन मंगवाई गई। क्रेन और स्थानीय लोगों के अथक प्रयासों से लगभग 30 मिनट तक चले इस चुनौतीपूर्ण और साहसिक बचाव अभियान के बाद दोनों घायलों को लोहे के जाल के नीचे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

अस्पताल में भर्ती और पुलिस की आगे की कार्रवाई

क्रेन की मदद से सुरक्षित बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद, दोनों गंभीर रूप से घायल युवाओं को आपातकालीन सेवा यानी 108 एम्बुलेंस की सहायता से तत्काल पन्ना के जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वर्तमान में जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में दोनों घायलों का गहन इलाज चल रहा है।

चिकित्सकों के अनुसार, इतने बड़े और भयानक हादसे के बाद भी दोनों की जान बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है, हालांकि गंभीर सदमे और चोटों के कारण वे अभी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने इस मामले में विधिवत रूप से केस दर्ज कर लिया है और यह जांच शुरू कर दी है कि ट्रक में क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग क्यों की गई थी तथा वाहन के फिटनेस की क्या स्थिति थी।

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