पन्ना : मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के बफर जोन से सटे ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर बाघ की दस्तक ने खौफ पैदा कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व की सीमाओं से लगे ग्राम पंचायत द्वारी के अंतर्गत आने वाले मोहनपुर हनुमतपुरा गांव में बीती रात एक बाघ रिहाइशी बस्ती के बेहद करीब पहुंच गया। बाघ ने न केवल गांव की सीमा में प्रवेश किया, बल्कि वहां मौजूद मवेशियों पर हमला करते हुए एक गाय को मौत के घाट उतार दिया और उसके बछड़े को अपने साथ घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीण अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।
घटना का विस्तृत विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना देर रात की है जब गांव के अधिकांश लोग सो रहे थे। मोहनपुर हनुमतपुरा निवासी पीड़ित पशुपालक रामशरण चंदपुरिया के घर के पास बने बाड़े में मवेशी बंधे हुए थे। इसी दौरान जंगल की ओर से आए एक व्यस्क बाघ ने बाड़े पर धावा बोल दिया। बाघ के हमले से मवेशियों में भगदड़ मच गई। बाघ ने एक गाय को अपना निशाना बनाया और उसे मौके पर ही मार डाला। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित के अनुसार, बाघ इतना आक्रामक था कि वह मृत गाय के बछड़े को अपने जबड़ों में दबाकर वापस घसीटते हुए जंगल की ओर चला गया। सुबह जब ग्रामीणों ने बाड़े का दृश्य देखा, तो वहां खून के निशान और गाय का क्षत-विक्षत शव पड़ा मिला, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों की आपबीती और आर्थिक नुकसान
गांव के निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि रात के समय अचानक मवेशियों के चिल्लाने और असामान्य हलचल की आवाजें सुनाई दी थीं। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते और टार्च लेकर बाहर निकलते, बाघ अपना काम कर चुका था। मुकेश कुमार के अनुसार, गांव के लोग अब रात के समय घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। पीड़ित पशुपालक रामशरण चंदपुरिया के लिए यह एक बड़ा आर्थिक आघात है, क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मवेशी ही उनकी आजीविका का मुख्य आधार होते हैं। एक गाय की मौत और बछड़े के लापता होने से परिवार के सामने संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बफर जोन के करीब होने के कारण अक्सर जंगली जानवर आबादी की ओर आ जाते हैं, लेकिन इस तरह रिहाइशी इलाके के भीतर घुसकर शिकार करने की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और रेस्क्यू टीम की तैनाती
घटना की सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व का प्रबंधन सक्रिय हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल ने तत्काल एक विशेष रेस्क्यू टीम और गश्ती दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया। डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल ने आधिकारिक रूप से घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ के पगमार्क (पंजों के निशान) की जांच की गई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि हमलावर वन्यजीव बाघ ही था। वन विभाग की प्राथमिक जांच के अनुसार, बाघ शिकार करने के बाद वापस जंगल के घने इलाके की ओर लौट गया है। हालांकि, सुरक्षा के दृष्टिकोण से गांव में और उसके आसपास के क्षेत्रों में वन विभाग के कर्मचारियों की एक टीम को स्थाई रूप से तैनात कर दिया गया है।
वन विभाग द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देश और रणनीतिक उपाय
ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने व्यापक कदम उठाए हैं। विभाग द्वारा क्षेत्र में अपनाई जा रही रणनीतियां और ग्रामीणों के लिए जारी निर्देश निम्नलिखित हैं:
1. गांव में मुनादी और अलर्ट: वन विभाग ने लाउडस्पीकर के माध्यम से पूरे गांव और आसपास की बस्तियों में मुनादी करवाई है। लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत विभाग को सूचित करने को कहा गया है।
2. रात में अकेले निकलने पर पाबंदी: ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो समूह में निकलें और अपने साथ टार्च तथा लाठी अवश्य रखें।
3. मवेशियों के लिए विशेष सुरक्षा: पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने मवेशियों को खुले में न बांधें। मवेशियों के बाड़ों को चारों ओर से सुरक्षित करें और वहां पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करें।
4. जंगल की ओर जाने पर रोक: ग्रामीणों को वर्तमान स्थिति को देखते हुए जंगल के भीतर या बफर जोन के प्रतिबंधित क्षेत्रों में लकड़ी काटने या मवेशी चराने जाने से पूरी तरह मना किया गया है।
5. निरंतर गश्त: वन विभाग की टीमें रात और दिन के समय गांव के बाहरी इलाकों में निरंतर गश्त कर रही हैं ताकि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उसे दोबारा आबादी की ओर आने से रोका जा सके।
6. मुआवजे की प्रक्रिया: विभाग ने पीड़ित पशुपालक रामशरण चंदपुरिया को हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। नियमानुसार उचित मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है ताकि पीड़ित को आर्थिक राहत मिल सके।
मानव-वन्यजीव संघर्ष और भविष्य की चुनौतियां
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बफर जोन में मानवीय गतिविधियों के बढ़ने और वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों में अतिक्रमण के कारण ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। मोहनपुर हनुमतपुरा की घटना यह दर्शाती है कि बाघ अब भोजन की तलाश में पारंपरिक शिकार छोड़कर पालतू मवेशियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो ग्रामीणों के लिए एक बड़ा खतरा है। प्रशासन को इस दिशा में दीर्घकालिक समाधान खोजने होंगे, जिसमें गांव की सीमाओं पर सोलर फेंसिंग या बेहतर प्रकाश व्यवस्था शामिल हो सकती है। फिलहाल, मोहनपुर हनुमतपुरा गांव में दहशत और सावधानी का माहौल बना हुआ है और वन विभाग की टीम बाघ की हर हलचल पर पैनी नजर रखे हुए है।
image source : https://www.bhaskar.com

Continue With Google
Comments (0)