पन्ना : मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक हृदयविदारक और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने वाली घटना सामने आई है। पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के कोर एरिया, जिसे वन्यजीवों के लिए सबसे सुरक्षित और संरक्षित क्षेत्र माना जाता है, वहां एक लगभग 65 वर्षीय बुजुर्ग का शव पेड़ से लटका हुआ पाया गया है। बुधवार, 6 मई को हुई इस बरामदगी ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि टाइगर रिजर्व प्रबंधन की उन दावों की भी पोल खोल दी है जिनमें 24 घंटे कड़ी निगरानी और गश्त की बात कही जाती है।
घटना का विस्तृत विवरण और शव की वर्तमान स्थिति
यह सनसनीखेज मामला पन्ना कोर रेंज के राजाबरिया जंगल का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीट गार्ड इंद्रजीत लोधी जब नियमित गश्त पर निकले थे, तब उन्हें जंगल के भीतर एक पेड़ पर फंदे से लटका हुआ शव दिखाई दिया। शव की स्थिति अत्यंत भयावह थी। गर्मी और समय बीतने के कारण शव पूरी तरह से सड़ चुका था और उसमें कीड़े पड़ गए थे। प्रारंभिक फॉरेंसिक आकलन और शव की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौत कम से कम 3 से 4 दिन पुरानी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां एक बुजुर्ग व्यक्ति कैसे पहुंचा और 4 दिनों तक विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सुरक्षा व्यवस्था और गश्त प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
पन्ना टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र वह हिस्सा होता है जहां मानवीय गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध होता है और वहां केवल अधिकृत कर्मचारी ही प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में एक बाहरी व्यक्ति का प्रवेश करना और फिर वहां आत्महत्या या हत्या जैसी घटना का घटित होना, सुरक्षा में एक बड़ी चूक की ओर इशारा करता है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पन्ना टाइगर रिजर्व पहले से ही आलोचनाओं के घेरे में है। पिछले एक महीने के भीतर ही इस रिजर्व में दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। अब कोर एरिया में कई दिनों तक एक मानव शव का पड़े रहना यह दर्शाता है कि विभाग के सुरक्षा और सतत निगरानी के दावे धरातल पर पूरी तरह से विफल साबित हो रहे हैं। यदि गश्त प्रभावी होती, तो शव के सड़ने से पहले ही उसका पता लगाया जा सकता था।
टाइगर रिजर्व प्रबंधन की कार्यप्रणाली और लापरवाही
वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक शव मिलने का मामला नहीं है, बल्कि यह विभाग की उस कार्यशैली को उजागर करता है जहां कागजों पर तो गश्त पूरी दिखाई जाती है, लेकिन असलियत में कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। जिस राजाबरिया जंगल में यह शव मिला है, वह बाघों की आवाजाही के लिए जाना जाता है। ऐसे में किसी आम नागरिक का वहां तक पहुंच जाना प्रबंधन की लापरवाही का पुख्ता प्रमाण है। क्या बीट गार्ड और सुरक्षाकर्मी नियमित रूप से अपनी बीट का भ्रमण कर रहे हैं? क्या उच्च अधिकारी इन गश्त रिपोर्टों की सत्यता की जांच करते हैं? ये वो प्रश्न हैं जिनका उत्तर अब जनता और सरकार दोनों मांग रहे हैं।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पन्ना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारा और साक्ष्य एकत्रित करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती मृतक की शिनाख्त करना है। मृतक की उम्र लगभग 65 वर्ष बताई जा रही है, लेकिन चेहरा और शरीर विकृत होने के कारण पहचान मुश्किल हो गई है। पुलिस ने आसपास के गांवों के सरपंचों, पंचायत सचिवों और ग्रामीणों को शिनाख्त के लिए बुलाया है। साथ ही जिले के सभी थानों में गुमशुदगी की शिकायतों का मिलान किया जा रहा है।
प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष और भविष्य की कार्रवाई
इस मामले पर पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बृजेंद्र पटेल ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की आपराधिक दृष्टिकोण से जांच कर रही है, जबकि वन विभाग ने भी अपनी तरफ से एक आंतरिक विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि गश्त के दौरान सुरक्षाकर्मियों से कहां चूक हुई और यह मामला पहले प्रकाश में क्यों नहीं आया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि गश्त में किसी भी कर्मचारी की लापरवाही पाई गई, तो उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक और सुरक्षात्मक निहितार्थ
पन्ना टाइगर रिजर्व न केवल मध्य प्रदेश बल्कि देश की शान है। यहां पर्यटन के साथ-साथ बाघों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन इस तरह की घटनाएं रिजर्व की छवि को धूमिल करती हैं। कोर एरिया में मानव हस्तक्षेप बढ़ना बाघों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा इतनी ही ढीली रही, तो आने वाले समय में शिकारी भी इसी तरह कोर क्षेत्र में घुसपैठ कर सकते हैं। यह घटना एक वेक-अप कॉल है कि टाइगर रिजर्व के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया जाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है। फिलहाल, पन्ना पुलिस और वन विभाग दोनों ही इस गुत्थी को सुलझाने में जुटे हैं।
image source : https://www.bhaskar.com
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