पन्ना जिले के शाहनगर क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाली और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करने वाली घटना सामने आई है। सोमवार दोपहर को शाहनगर के बोरी रोड पर स्थित कॉपरेटिव बैंक के सामने एक बोलेरो कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी एक गहरी नाली में जा गिरी। यह घटना उस समय हुई जब ड्राइवर को सड़क किनारे बनी नाली का अंदाजा नहीं लगा, क्योंकि वह कचरे और मिट्टी से पूरी तरह पटी हुई थी। देखने में वह नाली सड़क का ही हिस्सा प्रतीत हो रही थी, जिसके कारण ड्राइवर ने उसे सड़क समझकर गाड़ी आगे बढ़ा दी और अचानक गाड़ी गहरे गड्ढे में समा गई।

घटना का विवरण: धोखा बनी सड़क जैसी दिखने वाली नाली

सोमवार की दोपहर जब शाहनगर के व्यस्त बोरी रोड पर यह बोलेरो कार गुजर रही थी, तभी गाड़ी का पहिया अचानक नाली में चला गया। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह नाली लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाई गई थी, लेकिन लंबे समय से इसकी सफाई न होने के कारण इसमें भारी मात्रा में कचरा, प्लास्टिक और मिट्टी जमा हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कचरा ऊपर तक भर जाने के कारण यह नाली सड़क के समतल दिखाई देती है।

ड्राइवर के लिए यह स्थिति किसी बड़े धोखे से कम नहीं थी। उसे दूर से देखने पर ऐसा ही लगा कि वह सड़क का एक हिस्सा है, जिस पर गाड़ी आसानी से निकल सकती है। जैसे ही गाड़ी नाली के ऊपर पहुंची, जमीन धंस गई और कार नाली में जा फंसी। शोर सुनकर आसपास के लोग और राहगीर मौके पर जमा हो गए। राहत की बात यह रही कि इस घटना में गाड़ी में सवार किसी भी व्यक्ति को कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वाहन को काफी नुकसान पहुंचा।

रेस्क्यू ऑपरेशन: एक घंटे तक मशक्कत का दौर

कार के नाली में फंसने के बाद उसे बाहर निकालने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण रही। स्थानीय निवासी धीरज और वहां मौजूद अन्य लोगों ने तुरंत मदद के लिए पहल की। सबसे पहले कार के पिछले पहिये को निकालने की कोशिश की गई, लेकिन जैसे ही उसे थोड़ा खींचने का प्रयास किया गया, कार का संतुलन बिगड़ गया और पिछला पहिया बुरी तरह फंस गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने एक ट्रैक्टर को मौके पर बुलाया।

ट्रैक्टर के जरिए कार को खींचने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति तब और बिगड़ गई जब खिंचाव के कारण कार का अगला पहिया भी नाली के अंदर धंस गया। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानीपूर्वक किए गए प्रयासों के बाद, ट्रैक्टर की मदद से अंततः बोलेरो को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति भी बनी रही और काफी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा थे।

PWD की लापरवाही पर भड़का स्थानीय जनमानस

इस हादसे के बाद शाहनगर के स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों ने सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। स्थानीय निवासी शिवम सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में ऐसी घटना हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग की उदासीनता के कारण यहाँ नाली सफाई का कार्य कभी नहीं होता, जिसके चलते यह इलाका दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है।

लोगों का कहना है कि यह नाली केवल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गई है, जिससे न केवल सड़क की चौड़ाई कम हो गई है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए यह किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और PWD विभाग तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाता जब तक कोई बड़ी जनहानि न हो जाए। शिवम सिंह ने जोर देकर कहा कि इस सड़क से हर दिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, और अगर प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं।

प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग

इस घटना के बाद अब शाहनगर की जनता ने पन्ना जिला प्रशासन से सख्त मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। लोगों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • तत्काल सफाई: संबंधित विभाग को अविलंब नाली की गहरी सफाई करवानी चाहिए ताकि उसकी गहराई स्पष्ट नजर आए।

  • सुरक्षा घेरा: यदि नाली को पूरी तरह ढका नहीं जा सकता, तो कम से कम सुरक्षा के लिए चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए।

  • नियमित देखरेख: लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र के सड़कों और नालियों का समय-समय पर निरीक्षण करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

  • जवाबदेही: लापरवाह अधिकारियों की पहचान कर उन पर कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने लंबे समय से इस मार्ग की उपेक्षा की है।

निष्कर्ष

पन्ना जिले के शाहनगर की यह घटना एक चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही का परिणाम बड़ा हो सकता है। कचरे और मिट्टी से पटी हुई नाली ने जिस तरह से एक वाहन को अपने आगोश में लिया, वह साबित करता है कि शहर की बुनियादी सुविधाओं का रखरखाव कितना लचर है। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह प्रश्न जरूर खड़ा होता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? अब देखना यह है कि क्या स्थानीय प्रशासन और PWD विभाग इस घटना के बाद नींद से जागते हैं और बोरी रोड की इस खतरनाक नाली का कायाकल्प करते हैं, या फिर आम जनता को आगे भी ऐसे ही जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों का आक्रोश जायज है, क्योंकि टैक्स देने वाले नागरिक बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित सड़क की उम्मीद रखते हैं, न कि ऐसी खतरनाक चुनौतियों की जो उनके वाहन और जान दोनों के लिए खतरा बनी हों। पन्ना प्रशासन को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए न केवल इस नाली की मरम्मत करनी चाहिए, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की स्थिति की जांच कर सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करना चाहिए।

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