पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अजयगढ़ तहसील में बन रहे मझगांय डैम प्रोजेक्ट के डूब क्षेत्र को खाली कराने का अभियान तेज हो गया है। मंगलवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राम कुंवरपुर में स्थित 7 खाली मकानों को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा और प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

मझगांय डैम के डूब क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और खाली कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार को हुई इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में जिले के आला अधिकारियों का जमावड़ा लगा रहा। इसमें पन्ना जिले की एडीएम मधुवंत राय धुर्वे, एडिशनल एसपी बंदना चौहान और अजयगढ़ के एसडीएम संजय नागवंशी सहित प्रशासनिक व पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से घटनास्थल पर तैनात रहे। प्रशासन का यह सख्त रुख इस बात का संकेत है कि डूब क्षेत्र में आने वाले मकानों को मानसून से पहले हर हाल में खाली कराना अनिवार्य है।

मुआवजे और सूचना को लेकर ग्रामीणों का विरोध

प्रशासन की इस कार्रवाई का मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि डूब क्षेत्र में आने वाले कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें अभी तक सरकार की ओर से पूरा मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या एडवांस नोटिस दिए उनके मकानों को गिराया जा रहा है। विस्थापित होने वाले लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें अपना घर समेटने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया, जिससे उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने भीषण गर्मी के दौर में प्रशासन द्वारा की गई बिजली कटौती पर भी गहरा रोष प्रकट किया। लोगों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से पूरे गांव में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप है। बिजली न होने के कारण न केवल पीने के पानी का संकट गहरा गया है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी पूरी तरह रुक गई है। गांव के बुजुर्गों और महिलाओं ने प्रशासन से मानवीय आधार पर बिजली बहाल करने की मांग की है।

प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा है प्राथमिकता

ग्रामीणों के विरोध और आरोपों पर पन्ना की एडीएम मधुवंत राय धुर्वे ने अपना स्पष्ट पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि मझगांय डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले परिवारों को बहुत पहले ही विधिवत नोटिस जारी कर दिए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंगलवार को की गई कार्रवाई पूरी तरह सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर की गई है। आने वाले मानसून और संभावित बारिश के मौसम को देखते हुए, जलस्तर बढ़ने की स्थिति में किसी भी प्रकार की जनहानि को रोकना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।

एडीएम के अनुसार, फिलहाल सिर्फ उन्हीं मकानों को तोड़ा गया है जो पूरी तरह से खाली पड़े थे। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि जो परिवार अभी अपने घरों में रह रहे हैं, उन्हें भी अपना सामान और गृहस्थी समेटने के लिए अगले 3 से 4 दिनों का समय दिया गया है। उन्होंने इन परिवारों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं ताकि डैम प्रोजेक्ट के कार्य में कोई बाधा न आए और उनकी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बिजली संकट पर दिए निर्देश

ग्रामीणों द्वारा उठाई गई बिजली की समस्या पर एडीएम ने संज्ञान लेते हुए कहा कि उन्होंने एसडीएम और मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (MPEB) के अधिकारियों को मामले की तत्काल जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा है कि वे जल्द से जल्द गांव में बिजली की व्यवस्था सुचारू करें ताकि भीषण गर्मी में ग्रामीणों को राहत मिल सके। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि विस्थापन की प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना उनकी जिम्मेदारी है, जिसे वे गंभीरता से ले रहे हैं।

अगली रणनीति और विस्थापन की चुनौती

मझगांय डैम प्रोजेक्ट पन्ना जिले के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसके डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों का विस्थापन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन अब अगले कुछ दिनों में बाकी बचे परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी कर रहा है। प्रभावित परिवारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे विस्थापन की शर्तों और मुआवजे के कागजातों को लेकर प्रशासन के साथ समन्वय बनाएं ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।

यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन अब इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की दिशा में कोई देरी करने के मूड में नहीं है। विस्थापितों के सामने अब अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर नई जगह बसने की बड़ी चुनौती है। आने वाले कुछ दिन इन ग्रामीणों के लिए अत्यंत कठिन और निर्णायक साबित होंगे, क्योंकि उन्हें अपना जीवन फिर से नए सिरे से बसाना होगा। पन्ना प्रशासन ने भी यह भरोसा दिलाया है कि विस्थापन के दौरान विस्थापितों की हरसंभव मदद की जाएगी।

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