पन्ना जिले के स्वास्थ्य विभाग और जिला चिकित्सालय की कार्यप्रणाली पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक महीने के भीतर नवजात शिशुओं और बच्चों की मौत का एक बड़ा मामला सामने आया। पन्ना जिला चिकित्सालय की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई यानी एसएनसीयू (SNCU) में पिछले एक महीने के दौरान जन्म से लेकर एक वर्ष तक की आयु के कुल 22 बच्चों की मौत हो गई। इतनी बड़ी संख्या में लगातार बच्चों की मौत होने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और पीड़ित परिजनों व आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिला। इस दर्दनाक और गंभीर स्थिति के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।

सीएमएचओ डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी द्वारा अस्पताल का निरीक्षण और समीक्षा

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को पूरी तरह समझते हुए, शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने तत्काल पन्ना जिला अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर एसएनसीयू वार्ड और पीडियाट्रिक वार्ड का बारीकी से निरीक्षण किया।

इस निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने निम्नलिखित व्यवस्थाओं का जायजा लिया:

  • डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता: वार्ड में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति की जांच की गई।

  • उपचार व्यवस्था: बच्चों को दिए जा रहे इलाज के तौर-तरीकों और प्रोटोकॉल की समीक्षा की गई।

  • जीवनरक्षक सुविधाएं: वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों की स्थिति की गहनता से पड़ताल की गई ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी या चिकित्सीय कमी का पता लगाया जा सके।

परिजनों के गंभीर आरोप और कार्रवाई की मांग

अस्पताल में हुई इन लगातार मौतों से दुखी और नाराज परिजनों का सब्र टूट गया। निरीक्षण के दौरान परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और वहां तैनात चिकित्सा कर्मियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। परिजनों का कहना था कि यदि समय पर और बेहतर इलाज मिला होता, तो उनके मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं व सुविधाओं को तुरंत सुधारने की पुरजोर मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

सीएमएचओ का बयान: कम वजन और सेप्सिस बनी मौतों की मुख्य वजह

परिजनों के आरोपों और उठ रहे सवालों के बीच सीएमएचओ डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती जिन बच्चों की मौत हुई है, उनकी मुख्य वजह बेहद कम वजन (Low Birth Weight), सेप्सिस (Sepsis) और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं थीं।

सीएमएचओ ने यह भी जानकारी दी कि इन सभी 22 मामलों की विस्तृत और गहन समीक्षा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) को कम करने के लिए युद्ध स्तर पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच अभी जारी है।

यह पूरी घटना पन्ना जिले के स्वास्थ्य ढांचे के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यह जांच का प्रमुख विषय है कि क्या ये मौतें केवल गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं और कुपोषण या कम वजन का परिणाम थीं, या फिर इलाज के दौरान अस्पताल स्तर पर कोई बड़ी चूक या लापरवाही हुई है। प्रशासन की ओर से की जा रही विस्तृत जांच के पूरी होने के बाद ही इस मामले की वास्तविक और पुख्ता स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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