पन्ना जिले में रबी की फसल कटाई और उसके बाद की सरकारी खरीदी प्रक्रिया के दौरान अन्नदाताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला जिले के अजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत मझगाय रबी खरीदी केंद्र का है, जहां किसानों द्वारा बेची गई फसल का समय पर परिवहन न होने के कारण स्थिति विस्फोटक हो गई है। फसल बेचने के बाद भी उचित भुगतान न मिल पाने और गोदामों में उपज के ढेर लगे रहने से परेशान किसानों ने अब प्रशासन को सीधे चेतावनी दी है। भारतीय किसान यूनियन (पन्ना) के नेतृत्व में किसानों ने बुधवार, 20 मई को अजयगढ़ एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर तीन दिनों का अल्टीमेटम जारी किया है।
परिवहन की समस्या से जूझ रहे किसान मझगाय रबी खरीदी केंद्र पर किसानों ने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई, यानी रबी की फसल को सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पहुंचाया था। नियमों के अनुसार, फसल की तुलाई के बाद उसका परिवहन कर गोदामों तक पहुंचाया जाना चाहिए ताकि भुगतान प्रक्रिया शुरू हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसानों का कहना है कि फसल जमा किए हुए एक लंबा अरसा बीत चुका है, लेकिन परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। ट्रकों और अन्य वाहनों की कमी या प्रबंधन की लापरवाही के कारण फसल खरीदी केंद्र पर ही पड़ी हुई है।
इस विलंब का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। भुगतान न मिलने के कारण वे गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अन्नदाताओं का कहना है कि उन्होंने अपनी फसल तो सरकार के भरोसे छोड़ दी, लेकिन अब वे अपने ही पैसे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
आर्थिक संकट और पारिवारिक जिम्मेदारियां किसान कमलेश कुमार पटेल, जो कि भारतीय किसान यूनियन पन्ना के ब्लॉक अध्यक्ष हैं, ने बताया कि फसल का भुगतान न मिल पाने के कारण किसानों की कमर टूट गई है। उन्होंने कहा, "हमारे सामने कई तरह की परेशानियां हैं। एक तरफ घर में बच्चों की शादियां और अन्य मांगलिक कार्य अटके पड़े हैं, तो दूसरी तरफ आगामी खरीफ सीजन के लिए खेत की गहरी जुताई और खाद-बीज खरीदने के लिए हमारे पास पूंजी नहीं है।" आर्थिक तंगी के कारण किसान इस समय बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि किस प्रकार एक सरकारी प्रक्रिया में देरी सीधे तौर पर किसान परिवार के जीवन चक्र को प्रभावित कर रही है।
मौसम का खतरा और उपज की सुरक्षा खरीदी केंद्र पर परिवहन न होने के कारण एक और बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है—जगह की भारी कमी। चूंकि पुरानी उपज का उठाव नहीं हो रहा है, इसलिए केंद्र में नई फसल रखने के लिए स्थान ही नहीं बचा है। इससे अन्य किसान जो अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं, उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, इस समय मौसम भी किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बेमौसम बारिश, तेज आंधी और तूफान का खतरा लगातार बना हुआ है। यदि प्रशासन ने समय रहते फसल का परिवहन सुनिश्चित नहीं किया, तो खुले में रखी हुई यह फसल खराब हो सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
प्रशासन को तीन दिन की चेतावनी बुधवार, 20 मई को भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष कमलेश कुमार पटेल के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने अजयगढ़ एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद की। कलेक्टर के नाम सौंपे गए इस शिकायती आवेदन में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर महुआ और मझगाय केंद्र से शत-प्रतिशत फसल का परिवहन सुनिश्चित नहीं कराया गया, तो क्षेत्र के किसान उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तीन दिवस के भीतर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी। इस दौरान प्रमोद पाल, भाईराम पटेल, दिनेश, ईश्वरदीन और राजेश यादव सहित दर्जनों की संख्या में किसान उपस्थित रहे।
निष्कर्ष और प्रशासन की भूमिका पन्ना जिले के इन किसानों का संघर्ष इस बात को दर्शाता है कि सरकारी तंत्र को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की अत्यंत आवश्यकता है। समय पर परिवहन न होने से न केवल सरकारी संपत्ति (फसल) का नुकसान हो सकता है, बल्कि किसानों का विश्वास भी तंत्र से उठता जा रहा है। अब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि तीन दिन की समय-सीमा के भीतर युद्ध स्तर पर परिवहन कार्य संपन्न हो, ताकि किसानों को उनके हक का भुगतान मिल सके और वे अपने आगामी कृषि कार्य को सुचारू रूप से आगे बढ़ा सकें।
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