पन्ना जिले के अंतर्गत आने वाले रनवाहा गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। शनिवार को एक 40 वर्षीय किसान, बहादुर सिंह, जो कि मंगल सिंह राजपूत के पुत्र हैं, अपने ही घर की छत पर बारिश का पानी साफ करने का कार्य कर रहे थे। इस दौरान वे अनजाने में वहां से गुजर रही 11 हजार वोल्ट (11 KV) की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि किसान बुरी तरह झुलस गए और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद से रनवाहा गांव में न केवल मातम पसरा है, बल्कि बिजली विभाग की घोर लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है।
पन्ना में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बहादुर सिंह अपने घर की छत पर जमे बारिश के पानी की निकासी को सुगम बनाने के लिए ऊपर गए थे। छत के बेहद करीब से हाईटेंशन बिजली के तार गुजर रहे थे। जैसे ही किसान पानी साफ करने के लिए आगे बढ़े, हाईटेंशन लाइन की तीव्र चुंबकीय शक्ति और निकटता के कारण वे करंट की चपेट में आ गए। करंट लगते ही किसान बुरी तरह झुलस गए और मौके पर ही अचेत हो गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और डंडों के माध्यम से उन्हें बिजली के तारों से अलग किया। यदि स्थानीय लोगों ने त्वरित सूझबूझ का परिचय न दिया होता, तो यह घटना और भी भयानक रूप ले सकती थी।
अस्पताल में जारी है किसान का उपचार
घटना की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए बहादुर सिंह को पन्ना जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में पहुंचते ही उन्हें तत्काल आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका उपचार शुरू किया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि किसान का शरीर काफी झुलस गया है। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण उनकी जान बच गई है और हालत में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन उनकी स्थिति अभी भी नाजुक है और उन्हें निरंतर डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, अगले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण हैं।
पन्ना के ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति आक्रोश
इस घटना ने रनवाहा गांव के निवासियों को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद से ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि बिजली विभाग की अनियोजित कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ है। रिहायशी इलाकों के बीच से और मकानों की छतों के इतने करीब से हाईटेंशन लाइनें निकालना पूरी तरह से अवैध और खतरनाक है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायतें कीं, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों ने हमेशा इस ओर से आंखें मूंद लीं। यह लापरवाही अब एक किसान की जान लेने पर उतारू हो गई है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: एक बड़ा सवाल
इस घटना ने उन सभी दावों की पोल खोल दी है, जिनमें विभाग रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा करता है। नियमतः, किसी भी रिहायशी मकान के ऊपर या उसके छत के इतने करीब हाईटेंशन लाइन नहीं गुजरनी चाहिए। बिजली विभाग के इंजीनियरों और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं कि आखिर किसकी अनुमति से और किन सुरक्षा मानकों के तहत इन तारों को मानव बस्तियों के ऊपर से बिछाया गया है। यह केवल एक घटना नहीं है, बल्कि उस संभावित खतरे का प्रतिबिंब है जो हर उस घर के ऊपर मंडरा रहा है, जिसके पास से ये जानलेवा तार गुजर रहे हैं।
पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे और सुरक्षा की मांग
घटना के बाद अब पीड़ित परिवार और पूरा गांव एकजुट होकर दो प्रमुख मांगें कर रहा है:
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सुरक्षित स्थानांतरण: पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि रनवाहा गांव की आबादी वाले क्षेत्रों और मकानों के बेहद करीब से गुजर रही इन 11 KV की जानलेवा लाइनों को तत्काल प्रभाव से हटाकर आबादी से दूर शिफ्ट किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यह तार वहां से नहीं हटेंगे, वे चैन से नहीं बैठेंगे।
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आर्थिक सहायता: पीड़ित बहादुर सिंह परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य हैं। उनके गंभीर रूप से झुलसने के कारण परिवार के सामने इलाज का खर्च उठाना और भरण-पोषण का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ताकि बहादुर सिंह का बेहतर से बेहतर इलाज हो सके और उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
रनवाहा के ग्रामीणों ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते इन खतरनाक तारों को हटाया नहीं गया और पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं दिया गया, तो ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और शासन-प्रशासन की होगी। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि ग्रामीणों की जान की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध नहीं किया जाता।
निष्कर्ष
पन्ना जिले की यह घटना बिजली विभाग के लिए एक बड़ी चेतावनी है। एक मेहनतकश किसान का छत पर पानी साफ करना उसके लिए मौत का कारण बन गया, यह इस बात का सबूत है कि हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कितने बड़े खतरों के बीच जी रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और न केवल रनवाहा गांव में, बल्कि पूरे जिले के उन सभी रिहायशी क्षेत्रों का सर्वे करवाए जहां बिजली की लाइनें खतरे का सबब बनी हुई हैं। समय रहते उठाए गए कदम ही आगे चलकर ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने में सहायक सिद्ध होंगे। फिलहाल पूरा पन्ना जिला बहादुर सिंह के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है।
image source: https://www.bhaskar.com
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