पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की दोबारा गिरफ्तारी ने जिले में भारी विवाद खड़ा कर दिया है। जेल से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई और फिर रहस्यमयी तरीके से 'लापता' होने की खबर से न केवल उनके परिजनों में दहशत है, बल्कि आंदोलनकारी किसानों और आदिवासियों में भी जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। अमित के भाई ने प्रशासन पर 'किडनैपिंग' जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद पन्ना टाइगर रिजर्व प्रशासन को अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी।

रिहाई के वक्त 'गायब' हुए अमित: भाई ने जारी किया वीडियो

अमित भटनागर पिछले कुछ समय से जेल में बंद थे। उनकी जमानत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके परिजन उन्हें लेने जेल पहुँचे थे, लेकिन वहां जो हुआ उसने सबको चौंका दिया।

  • अपहरण का आरोप: अमित के भाई अंकित भटनागर ने एक वीडियो जारी कर पुलिस और प्रशासन पर सीधे आरोप लगाए हैं। अंकित का कहना है कि जब वे जेल पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि अमित को पुलिस और वन विभाग के लोग पहले ही अपने साथ कहीं ले जा चुके हैं।

  • जान को खतरा: अंकित ने इस पूरी प्रक्रिया को 'अपहरण' करार देते हुए दावा किया कि परिवार को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने अमित की जान को खतरा बताते हुए कलेक्टर और एसपी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) का स्पष्टीकरण: वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई

मामले के राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने स्थिति स्पष्ट की।

  1. गिरफ्तारी की पुष्टि: डिप्टी डायरेक्टर ने पुष्टि की कि अमित भटनागर को पीटीआर की टीम ने हिरासत में लिया है।

  2. प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का आरोप: प्रशासन का आरोप है कि कुछ समय पहले एक प्रदर्शन के दौरान अमित भटनागर बिना अनुमति टाइगर रिजर्व के 'कोर एरिया' (दौड़न बांध क्षेत्र) में दाखिल हुए थे।

  3. कानूनी उल्लंघन: यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है, और इसी उल्लंघन के आरोप में यह दोबारा गिरफ्तारी की गई है।

  4. परिजनों की दलील: हालाँकि, परिजनों का कहना है कि उन्हें इस गिरफ्तारी की कोई पूर्व सूचना या आधिकारिक दस्तावेज नहीं सौंपे गए, जो नियमों का उल्लंघन है।

आदिवासियों और किसानों में उबाल: मुआवजे और सर्वे की लड़ाई

अमित भटनागर केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि इलाके के किसानों और आदिवासियों की आवाज बन चुके हैं। वे केन-बेतवा और रुंझ बांध परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

  • धांधली के खिलाफ आवाज: अमित ने मुआवजे के वितरण और सर्वे में हो रही कथित धांधली के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किए हैं।

  • आंदोलनकारी एकजुट: उनकी दोबारा गिरफ्तारी की खबर जैसे ही फैली, आंदोलनकारी किसानों और आदिवासियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

गरमाई राजनीति: जीतू पटवारी पहुँचे पन्ना

अमित भटनागर की गिरफ्तारी अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी आज खुद अमित भटनागर और उनके सहयोगियों से मुलाकात करने पन्ना पहुँचे।

  • एसपी ऑफिस का घेराव: इससे पहले भी अमित की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में आदिवासियों और किसानों ने एसपी ऑफिस के सामने भारी प्रदर्शन किया था।

  • तनावपूर्ण स्थिति: वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

प्रशासन जहाँ इसे कानूनी प्रक्रिया बता रहा है, वहीं आंदोलनकारियों का कहना है कि यह उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है।


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