मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आ रही है, जहाँ विकास के दावों और हकीकत के बीच की खाई गहरी होती जा रही है। जिले की ग्राम पंचायत बृजपुर में इस समय भीषण गर्मी और जल संकट ने कोहराम मचा रखा है। जब आसमान से आग बरस रही है और तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, तब यहाँ की 7 हजार से अधिक की आबादी अपनी प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। सरकारी फाइलों में भले ही नल-जल योजना को सफल घोषित कर दिया गया हो, लेकिन बृजपुर के ग्रामीणों के लिए पानी का एक लोटा जुटाना भी किसी युद्ध जीतने जैसा हो गया है।


पुरानी व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता की मार

बृजपुर गांव की जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। स्थानीय निवासी रतनलाल ने गांव की बदहाली का जिक्र करते हुए बताया कि आज के आधुनिक युग में भी यह पंचायत 40 साल पुरानी पाइपलाइन के भरोसे चल रही है।

  • जल जीवन मिशन की विफलता: करीब 20 साल पहले जल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी की टंकी का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन विडंबना यह रही कि नई पाइपलाइन बिछाने की जहमत नहीं उठाई गई।

  • सीमित पहुंच: पुरानी और जर्जर पाइपलाइन के कारण आज स्थिति यह है कि 7 हजार की आबादी वाले इस गांव के केवल 30 से 35 घरों तक ही पानी पहुंच पा रहा है।

  • राजस्व का नुकसान: जागरूक नागरिक रूपेश जैन ने प्रशासन की एक और बड़ी लापरवाही उजागर की है। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों से जलकर की वसूली नहीं की गई है।

  • बिजली बिल का बोझ: एक तरफ पंचायत को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पानी की सप्लाई के नाम पर बिजली बिलों पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिसका वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच रहा है।


शोपीस बने सरकारी कुएं और सूखते जलस्रोत

गांव में पानी के पारंपरिक स्रोतों की हालत भी दयनीय है। प्रशासनिक उदासीनता ने गांव के प्राकृतिक और निर्मित जल स्रोतों को खत्म कर दिया है।

  1. रखरखाव का अभाव: स्थानीय निवासी संतोष आदिवासी के अनुसार, प्रशासन ने लाखों रुपए खर्च करके गांव में तीन सरकारी कुओं का निर्माण कराया था।

  2. सूखते कुएं: उचित देखरेख और समय पर जीर्णोद्धार न होने के कारण ये तीनों कुएं अब पूरी तरह सूख चुके हैं और केवल 'शोपीस' बनकर रह गए हैं।

  3. ग्रामीणों का दर्द: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि इन कुओं की समय पर सफाई और मरम्मत कराई जाती, तो आज जल संकट इतना भयावह रूप नहीं लेता।


आदिवासी बस्तियों में सबसे विकराल स्थिति

बृजपुर के गिरमानी टोला पुरवा और नई बस्ती पावर हाउस जैसे इलाकों में स्थिति नरकीय हो चुकी है। यहाँ रहने वाले आदिवासी परिवारों के लिए गर्मी का यह मौसम किसी अभिशाप से कम नहीं है।

  • कोसों दूर पानी: स्थानीय महिला लक्ष्मी गोंड ने बताया कि इन बस्तियों के परिवारों को पानी लाने के लिए भीषण गर्मी में एक किलोमीटर दूर तक पैदल चलना पड़ता है।

  • समय की बर्बादी: ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों का आधा दिन केवल पीने के पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता है, जिससे उनकी मजदूरी और अन्य दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

  • स्वास्थ्य का खतरा: 42 डिग्री की तपती धूप में लंबी दूरी तय करने के कारण बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।


पंचायत सचिव ने स्वीकारी बुनियादी ढांचे की कमी

जब इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम पंचायत बृजपुर के सचिव असित रंजन से चर्चा की गई, तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

  • जर्जर पाइपलाइन: सचिव ने माना कि सप्लाई के लिए बिछी लाइन बहुत पुरानी हो चुकी है, जिसके कारण समान वितरण संभव नहीं है।

  • समाधान की मांग: उन्होंने स्पष्ट किया कि बृजपुर में जल संकट दूर करने के लिए तत्काल नई पाइपलाइन बिछाने और कम से कम दो नए बोरवेल कराने की अत्यंत आवश्यकता है।

बृजपुर की यह स्थिति पन्ना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ एक ओर सरकार 'हर घर जल' का नारा दे रही है, वहीं बृजपुर के ग्रामीण आज भी एक किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब नींद से जागता है और इन 7 हजार ग्रामीणों को इस भीषण प्यास से मुक्ति दिलाता है।


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