पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। पूर्व विधानसभा प्रत्याशी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडे सहित उनके परिजनों पर पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर ने जिले की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोमवार, 4 मई को पन्ना जिला कांग्रेस कमेटी के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और प्रशासनिक कार्रवाई को 'सत्ता के दबाव में की गई दमनकारी नीति' करार दिया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला अध्यक्ष अनीश खान ने नायब तहसीलदार शशिकांत दुबे को राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

**अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार की कड़ियां**
कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ग्राम पिस्टा निवासी भरत मिलन पांडे लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय वन विभाग की भूमि पर हो रहे अवैध उत्खनन के खिलाफ मुखर थे। आरोप है कि एक रसूखदार रेलवे ठेकेदार और वन विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से बेशकीमती प्राकृतिक संपदा का दोहन किया जा रहा है। पांडे ने इस सांठगांठ को उजागर करने के लिए लगातार साक्ष्य जुटाए और प्रशासन से शिकायत की। कांग्रेस का दावा है कि इसी 'अवैध धंधे' के राजदारों को बचाने के लिए और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और वन विभाग ने मिलकर भरत मिलन पांडे और उनके परिवार के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज की है।

 जयकरण अहिरवार मामला: जातिसूचक गालियां और मारपीट का आरोप 
इस पूरे विवाद की जड़ 23 अप्रैल 2024 की एक घटना में छिपी है। जिलाध्यक्ष अनीस खान ने बताया कि अजयगढ़ तहसील के ग्राम पिस्टा में स्थानीय निवासी जयकरण अहिरवार के साथ डिप्टी रेंजर महीप रावत और उनके साथियों ने न केवल बर्बरतापूर्वक मारपीट की, बल्कि उन्हें जातिसूचक गालियां देकर अपमानित भी किया। पीड़ित जयकरण ने इसकी शिकायत अजयगढ़ थाने में दर्ज कराई थी और उसकी मेडिकल जांच (MLC) भी हुई थी, जिसमें चोटों की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद, कांग्रेस का आरोप है कि रसूखदारों के दबाव में पुलिस ने अब तक आरोपियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की है, बल्कि पीड़ित का साथ देने वाले कांग्रेसी नेताओं को ही निशाना बनाया जा रहा है।

कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें और आंदोलन का अल्टीमेटम
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने प्रशासन के समक्ष तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि जयकरण अहिरवार के साथ मारपीट करने वाले वन विभाग के दोषी कर्मचारियों पर तत्काल प्रभाव से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। दूसरी मांग के तहत, भरत मिलन पांडे और उनके परिजनों पर दर्ज किए गए 'फर्जी' मुकदमे की किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए और बेगुनाहों के नाम एफआईआर से हटाए जाएं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध उत्खनन पर पूर्णतः रोक लगाने और इसमें शामिल ठेकेदारों व अधिकारियों की जांच करने की है। जिला कांग्रेस कमेटी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। आने वाले समय में पन्ना के प्रत्येक ब्लॉक और तहसील स्तर पर चक्का जाम और उग्र जेल भरो आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

प्रशासनिक पक्ष और स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य
पन्ना जिला हमेशा से अपने हीरा खदानों और समृद्ध वन संपदा के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में यह अवैध उत्खनन का केंद्र भी बन गया है। जानकारों का मानना है कि चुनाव के बाद से ही यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान बढ़ी है। जहां एक ओर भाजपा इसे कानून-व्यवस्था का सामान्य मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे सीधे तौर पर 'लोकतंत्र की हत्या' और विपक्ष को डराने की कोशिश मान रही है। ज्ञापन लेने वाले नायब तहसीलदार शशिकांत दुबे ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया है कि ज्ञापन को उचित माध्यम से राज्यपाल महोदय तक पहुंचाया जाएगा और कानून सम्मत जांच सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, इस आश्वासन से कांग्रेस कार्यकर्ता संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं और जिले में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। इस विरोध प्रदर्शन में अनीश खान के साथ भारी संख्या में ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस के पदाधिकारी और महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता भी शामिल रहीं, जो प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। अब देखना यह होगा कि राज्यपाल इस संवेदनशील मामले में क्या हस्तक्षेप करते हैं और पन्ना पुलिस अपनी जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

image source : https://www.bhaskar.com/