पन्ना जिले के स्वास्थ्य महकमे में उस समय खलबली मच गई जब एक महिला की मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम में हुई देरी और एंबुलेंस सेवा की विफलता का मामला सामने आया। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने न केवल इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, बल्कि जिले की संपूर्ण एंबुलेंस व्यवस्था की समीक्षा के भी आदेश दिए हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और संवेदनशीलता की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिसे लेकर अब विभाग द्वारा जांच और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हृदयविदारक घटना और लापरवाही का सिलसिला

यह दुखद मामला पन्ना के पड़रहा गांव की 40 वर्षीय विद्या कुशवाहा से जुड़ा है। मानसिक तनाव के चलते विद्या ने 20 जून की रात करीब 11:30 बजे जहरीला पदार्थ का सेवन कर लिया था। उनकी जान बचाने के लिए परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन यहीं से लापरवाही का सिलसिला शुरू हो गया। परिजनों का आरोप है कि कॉल करने के बावजूद एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची और उसे आने में ढाई घंटे का लंबा समय लगा, जिसके बाद वह रात 2 बजे वहां पहुंची।

विपत्ति यहीं समाप्त नहीं हुई। जब मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे अजयगढ़ से पन्ना जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया, तब भी एंबुलेंस की व्यवस्था के लिए परिजनों को 1 घंटे तक अस्पताल में भटकना पड़ा। एंबुलेंस के इंतजार में बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया और अंततः, परिजनों को निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। यह एंबुलेंस सेवा की विफलता का एक जीता-जागता उदाहरण था, जिसने एक परिवार से उनका सदस्य छीन लिया।

पोस्टमार्टम के लिए तीन घंटे का संघर्ष

मृत्यु के उपरांत भी परिवार का संघर्ष कम नहीं हुआ। 21 जून की सुबह करीब 9 बजे पुलिस पंचनामा पूर्ण होने के बाद जब शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लाया गया, तो वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नदारद मिले। सुबह 9 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, यानी तीन घंटे तक शोकाकुल परिजन शव के साथ अस्पताल परिसर में भटकते रहे। ड्यूटी डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण समय पर पोस्टमार्टम नहीं हो पाया, जिससे परिजनों में आक्रोश बढ़ गया। अस्पताल में भारी हंगामा हुआ, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने और पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी करने के लिए डॉ. हिमांशु शर्मा को आनन-फानन में बुलाना पड़ा।

CMHO का कड़ा रुख और प्रशासनिक कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण की जानकारी मिलते ही पन्ना जिले के CMHO डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने संज्ञान लिया और स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डॉ. तिवारी ने इमरजेंसी और पोस्टमार्टम ड्यूटी में तैनात डॉ. जितेंद्र यादव को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि डॉ. यादव को उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के बारे में पूर्व में ही सूचित किया गया था, इसके बावजूद वे बिना किसी अधिकृत पूर्व सूचना के 'टीबी कैंप' के लिए चले गए थे। CMHO डॉ. तिवारी ने कहा, "मैं इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा हूं। यदि डॉक्टर की ओर से अपनी अनुपस्थिति का कोई ठोस, तार्किक और वैधानिक कारण प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो यह स्पष्ट माना जाएगा कि उन्होंने अपनी मर्जी से इमरजेंसी ड्यूटी का परित्याग किया है।"

भविष्य के लिए चेतावनी और सख्त कदम

डॉ. तिवारी ने चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो डॉक्टर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु वरिष्ठ स्तर पर प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने पूरे स्वास्थ्य अमले को भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की सख्त हिदायत दी है।

इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और तत्परता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, CMHO ने एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जिले में संचालित सभी एंबुलेंस की फिटनेस रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तलब की है। अस्पताल परिसर में अक्सर नजर आने वाली खराब या पंचर एंबुलेंसों पर भी अब विभाग कड़ी नजर रखेगा ताकि मरीजों को दोबारा ऐसी दुर्दशा का सामना न करना पड़े।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल

पन्ना जिले की यह घटना न केवल एक परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह जिला स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भी एक बड़ा सबक है। एंबुलेंस का देरी से आना और डॉक्टर का अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित रहना—ये दो ऐसे मुद्दे हैं जो स्वास्थ्य विभाग की विश्वसनीयता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। उम्मीद है कि CMHO द्वारा की जा रही यह जांच और एंबुलेंस फिटनेस की समीक्षा आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाएगी और पन्ना के नागरिकों को बेहतर एवं समयबद्ध आपातकालीन सुविधाएं मिल सकेंगी।

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