पन्ना जिले के करही गांव में मंगलवार की दोपहर एक अत्यंत दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है। घर के बाहर शांतिपूर्वक बैठे एक 11 वर्षीय मासूम पर बंदरों के झुंड में से एक बौखलाए बंदर ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में बच्चे के सिर में गंभीर चोटें आई हैं और वह लहूलुहान हो गया। घटना के बाद से ही गांव में बंदरों के बढ़ते आतंक को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

घटना का विवरण और हमले की वजह

घायल बालक की पहचान अंकित कुशवाह (11 वर्ष) के रूप में हुई है, जो कक्षा तीसरी का छात्र है। अंकित के पिता रामदीन कुशवाह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उनका बेटा मंगलवार दोपहर अपने घर के बाहर बैठा हुआ था। इसी दौरान, गांव के ही कुछ अन्य बच्चे वहां मौजूद बंदरों के झुंड पर लगातार पत्थर फेंक रहे थे। बच्चों की इस शरारत से बंदर बुरी तरह बौखला गए। इसी आपाधापी और गुस्से के बीच, झुंड में से एक आक्रामक बंदर ने सीधे अंकित पर धावा बोल दिया। अंकित उस समय कहीं से भी उस शरारत में शामिल नहीं था, लेकिन उसे बंदर के क्रोध का शिकार होना पड़ा।

जान बचाने के लिए संघर्ष

हमला इतना अचानक और आक्रामक था कि अंकित को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बंदर ने अंकित को अपने कब्जे में लेते हुए उसके सिर पर कई बार दांतों से गहरा प्रहार किया। बंदर की पकड़ इतनी मजबूत थी कि बच्चा बुरी तरह जख्मी हो गया। अंकित की दर्द भरी चीखें सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण और परिजन तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। लोगों ने काफी मशक्कत, सूझबूझ और हो-हल्ला मचाकर बच्चे को बंदर के चंगुल से छुड़ाया। यदि ग्रामीण समय रहते वहां नहीं पहुंचते, तो स्थिति और भी अधिक भयावह हो सकती थी।

गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती

हमले के बाद अंकित को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति का आकलन किया और प्राथमिक उपचार प्रदान किया। हालांकि, डॉक्टर ने पाया कि बच्चे के सिर में जो जख्म हैं, वे काफी गहरे और गंभीर प्रकृति के हैं। प्राथमिक उपचार के बाद, बेहतर और विशेष चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता को देखते हुए उसे पन्ना जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल, बच्चे का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

परिवार और ग्रामीणों में व्याप्त सदमा

अंकित के पिता रामदीन कुशवाह पेशे से एक मजदूर हैं और अपनी दिन-रात की मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इस अचानक हुई दुर्घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के अन्य लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब बंदरों ने इस तरह से किसी को निशाना बनाया हो। क्षेत्र में बंदरों की बढ़ती संख्या और उनका हिंसक व्यवहार ग्रामीणों के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और मासूम को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।

प्रशासन के समक्ष बढ़ती चुनौती

पन्ना जिले में बंदरों द्वारा लोगों पर हमले की घटनाएं पिछले कुछ समय में बढ़ी हैं। करही गांव की इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और उन्हें सुरक्षित वनों की ओर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, बच्चों को बंदरों के पास न खेलने या उन्हें तंग न करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।

अंकित के ठीक होने की कामना पूरा गांव कर रहा है, लेकिन बंदरों का खौफ अब भी लोगों के मन में घर कर गया है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष कितना घातक हो सकता है। फिलहाल, जिला अस्पताल में इलाज करा रहे अंकित के लिए प्रार्थनाओं का दौर जारी है और परिजन उसकी शीघ्र स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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