पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत नयापुरवा गांव में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। मंगलवार को एक निर्माणाधीन कुएं की खुदाई के दौरान मिट्टी अचानक धंस गई, जिसमें दबकर पांच मजदूरों की असमय मौत हो गई। इस घटना ने निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा के दावों की पोल खोल कर रख दी है। मृतकों के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।
पन्ना हादसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पोर्टल पर गड़बड़ी
घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, मंगलवार को नयापुरवा में वीबीजी-रामजी योजना के तहत वर्ष 2024-25 में स्वीकृत एक कुएं का निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के समय कुएं के भीतर कुल सात मजदूर कार्य कर रहे थे। गनीमत रही कि उनमें से दो मजदूर पानी पीने के लिए कुएं से बाहर आ गए थे, जिससे उनकी जान बच गई। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हृदयविदारक हादसा सुबह लगभग 10 बजे हुआ।
हादसे के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
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बचाव दल में देरी: घटना के तीन घंटे बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि यदि रेस्क्यू टीम समय पर पहुंच जाती, तो शायद कुछ जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
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नियमों के विपरीत ठेका: स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच ने सरकारी नियमों के विपरीत जाकर इस निर्माण कार्य को ठेके पर दे रखा था।
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पोर्टल से गायब नाम: सबसे बड़ी प्रशासनिक अनियमितता यह सामने आई है कि कार्यस्थल पर काम करने वाले इन पांचों मजदूरों का नाम सरकारी वीबीजी-रामजी पोर्टल पर कहीं भी दर्ज नहीं है।
पन्ना: मजदूरी के लालच ने छीनी खुशियां
मृतक चुन्नू के बेटे राकेश ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि मजदूरों को सामान्य मजदूरी दर 350 रुपये के स्थान पर 500 रुपये देने का प्रलोभन दिया गया था। इसी अतिरिक्त 150 रुपये की मजदूरी के लालच में मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर कुएं के अंदर उतरने को मजबूर हुए।
परिजनों ने बताया कि निर्माण स्थल नदी के किनारे था, जहां की मिट्टी रेतीली और नम है। मिट्टी के धंसने की आशंका पहले से ही प्रबल थी, इसके बावजूद मजदूरों को सुरक्षा उपकरणों के बिना कुएं की गहराई में उतारा गया। यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
पन्ना त्रासदी: मृतकों के नाम और सरकारी सहायता
इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले पांचों व्यक्तियों की पहचान आशीष, राजकुमार, रामपाल, चुन्नू और चुनवाद पाल के रूप में हुई है। सरकार ने इन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि की घोषणा की है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए पन्ना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सतीश सिंह ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि पोर्टल पर नाम दर्ज न होने और कार्य में बरती गई लापरवाही की गहन जांच की जाएगी।
निष्कर्ष: जवाबदेही और सुधार की दरकार
पन्ना जिले के नयापुरवा की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक आपराधिक लापरवाही का परिणाम प्रतीत होती है। एक तरफ जहां सरकार मजदूरों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, वहीं धरातल पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले जिम्मेदार लोग सुरक्षा को दरकिनार कर रहे हैं। पोर्टल में नाम दर्ज न होना और अवैध ठेकेदारी प्रथा का चलन इस पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
अब स्थानीय लोग और मृतक के परिजन प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर केवल विभागीय जांच न हो, बल्कि कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी भी निर्माण कार्य के दौरान ऐसी लापरवाही न हो। पन्ना प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी परीक्षा है कि वह पीड़ित परिवारों को न्याय दिला पाता है या नहीं। समाज के हर वर्ग की नजरें अब इस मामले की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या प्रशासन पोर्टल में नाम न होने के कारण को सार्वजनिक करेगा? क्या ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने वाले सरपंच और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? ये वो सवाल हैं, जिनका जवाब पन्ना की जनता को मिलना चाहिए।
image source : gemini ai
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