भोपाल: शोर की राजधानी बनाने पर तुला नगर निगम

राजधानी भोपाल को साफ-सुथरा बनाने का जिम्मा उठाने वाली नगर निगम अब शहर को शोर की राजधानी बनाने पर तुली है। पिछले साल ही निगम ने कचरा गाड़ियों पर लाउडस्पीकर लगाने के लिए 16 लाख रुपये खर्च किए थे, और अब स्वच्छता भारत मिशन के नाम पर करीब 900 नए ऑडियो सिस्टम खरीदने की तैयारी की जा रही है। निगम का दावा है कि इससे जागरूकता बढ़ेगी, लेकिन भोपाल की जनता सवाल उठा रही है, क्या शोर मचाने से ही शहर साफ होगा?

खरीद की लंबी फेहरिस्त

निगम द्वारा तैयार की गई लिस्ट किसी डीजे ऑपरेटर की दुकान जैसी प्रतीत हो रही है, जिसमें शामिल हैं:

  • 350 हूटर मशीनें
  • 350 बड़े लाउडस्पीकर
  • 50 छोटे स्पीकर
  • माइक्रोफोन, पेन ड्राइव और भारी-भरकम वायरिंग

‘हूटर्स ने छीना सुकून’

निगम के इस फैसले पर शहर के रिहायशी इलाकों में गुस्सा फूट रहा है। सिंधी कॉलोनी के निवासी राजेश ने कहा, ‘हमें दिन के बेवक़्त बजने वाले इन हूटर्स की जरूरत नहीं है। शोर भी एक तरह का प्रदूषण है। नगर निगम समाधान ढूंढने के बजाय और अधिक शोर पैदा कर रहा है।’ लोगों का कहना है कि सुबह-सुबह बजने वाले तेज संगीत और हूटर्स ने बुजुर्गों और बच्चों का सुकून छीन लिया है।

परिषद की बैठक में मचेगा 'हंगामा'

इस खरीद को लेकर निगम के भीतर भी असंतोष के सुर हैं। कई पार्षदों ने सवाल उठाया है कि जब पिछला निवेश (16 लाख रुपये) अभी तक अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पाया, तो फिर से जनता के पैसे को स्पीकर्स पर क्यों खर्च किया जा रहा है? अगली परिषद बैठक में विपक्ष इस मुद्दे पर महापौर और अधिकारियों को घेरने की रणनीति बना चुका है।

यह देखना होगा कि निगम के इस कदम का शहर के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या वाकई जागरूकता बढ़ाने की दिशा में यह सही कदम है।