सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर चल रहे बैंक फ्रॉड मामले में शुक्रवार को नए नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस कोर्ट में दायर की गई पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई के बाद जारी किए गए हैं। PIL में अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप और उसकी कंपनियों पर 1.5 लाख करोड़ रुपए बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड की कोर्ट मॉनिटर्ड जांच की मांग की गई है। इस पर कोर्ट ने CBI और ED से अंबानी के खिलाफ चल रही जांच पर 10 दिन में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सुनवाई की 5 बड़ी बातें जनहित याचिका में फ्रॉड के आरोप PIL में कहा गया कि CBI की 21 अगस्त की FIR और ED की कार्यवाही सिर्फ फ्रॉड के छोटे हिस्से को कवर करती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI और ED की तरफ से पेश होकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का समय मांगा। पिछली सुनवाई में बेंच ने पार्टियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा था। PIL को तीन हफ्ते बाद सुनवाई के लिए पोस्ट किया गया। फंड डायवर्जन मामले में 10,117 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी जब्त इससे पहले ED ने नवंबर में समूह के खिलाफ अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। ED के अनुसार, ताजा कार्रवाई में मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। इसके साथ ही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं। ED ने समूह की अन्य कंपनियों के FD और निवेश भी अटैच किए हैं, जिनमें रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। जांच में फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा ED ने अपनी जांच में पाया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था। लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED के मुताबिक ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए। लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले। ED ने इसे 'इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर' बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए।
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अनिल अंबानी पर ₹1.5 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप:सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया; CBI-ED से 10 दिन में सीलबंद रिपोर्ट मांगी
January 28, 2026 06:04 PM
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